20 फीसदी जॉब कार्डधारकों को भी नहीं मिल रहा मनरेगा के तहत काम

रुद्रपुर।.. समाज में गरीबों को राजगार उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई मनरेगा योजना सच में गजब की है. इस योजना के तहत उन लोगों को भी काम दिया जा रहा है जिनके पास जॉब कार्ड ही नहीं है. यही नहीं कई बार तो इसमें सालों पहले स्वर्ग सिधार गए लोग भी काम करने के लिए पहुंच जाते हैं और अपनी दिहाड़ी लेकर वापस लौट जाते हैं.

उत्तराखंड के तराई वाले जिले उधमसिंह नगर का हाल ऐसा है कि यहां मनरेगा के तहत भी लोगों को काम नहीं मिल रहा, जबकि मनरेगा साल में कम से कम 100 दिन के रोजगार की गारंटी देता है. यकीन नहीं आता तो आपको बता दें कि जिले में 87,754 जॉब कार्डधारक हैं और सिर्फ 12,620 जॉब कार्डधारकों को ही रोजगार मिला है. इन आंकड़ों से अनुमान लगाया जा सकता है कि सरकार गरीबों को रोजगार मुहैया कराने के प्रति कितनी गंभीर है.

गरीब परिवारों को रोजगार दिलाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शुरू की गई है. इसमें प्रत्येक व्यक्ति को 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है. मनरेगा में सड़क, हैंडपंप, कृषि कार्य, नहरों व नालियों की सफाई जैसे कार्य कराए जाते हैं.

योजना का लाभ मुहैया कराने के लिए जिले में 87,754 लोगों का जॉब कार्ड बनाया गया है. चालू वित्तीय वर्ष में जनवरी तक सिर्फ 12,620 जॉब कार्डधारकों को रोजगार मिला. इसमें केवल 123 ऐसे परिवार हैं, जिन्हें 100 दिन का काम मिला है. 3,94,185 मानव श्रम दिवस हुआ हैं और इसमें सभी 12,620 जॉब कार्डधारकों के श्रम दिवस शामिल हैं.

हैरानी यह है कि मनरेगा बहुप्रतीक्षित योजना होने के बाद भी कम लोगों को काम मिल पाया है. नरेगा में श्रमिक को एक दिन की 142 रुपये मजदूरी मिलती है, जबकि इससे कही ज्यादा मजदूरी किसानों के यहां काम करने या सिडकुल स्थित फैक्ट्रियों में मिलती है. ऐसे में मनरेगा की ओर कम लोगों का रुझान होता है.