AAP ने पूरा किया मोदी का सपना

पिछले साल मई में आम चुनाव से पहले प्रचार के दौरान और हाल में देश के कई राज्यों में हुए आम चुनाव के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत की बात कही थी. पता नहीं नरेंद्र मोदी ने ये बातें बस यूं ही कहने के लिए कहीं या फिर वे इस दिशा में कुछ काम भी कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली जरूर कांग्रेस मुक्त हो गई है. दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटें आम आदमी पार्टी ओर 3 सीटें बीजेपी की झोली में गिरी हैं. कांग्रेस के लिए दिल्ली विधानसभा शून्य बट्टा सन्नाटा हो गई है.

राजनैतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. दिल्ली पहली ऐसी विधानसभा बन गई है जो सच में कांग्रेस मुक्त है. आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी विधानसभा में कांग्रेस का एक भी सदस्य चुनकर नहीं आया. शून्य बट्टा सन्नाटा एक बात है, लेकिन 70 में से कांग्रेस के 62 उम्मीदवार तो अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए. यही नहीं पिछले 5 विधानसभा चुनाव से लगातार जीतते आ रहे कांग्रेस प्रत्याशी भी इस बार तीसरे नंबर पर ख‍िसक गए. कांग्रेस के 33 उम्मीदवार तो ऐसे रहे जो 10 हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाए.

जमानत जब्त होने वाले उम्मीदवारों में कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन, पूर्व सांसद महाबल मिश्रा, पूर्व मंत्री प्रो. किरन वालिया, हारून यूसुफ, डा. नरेंद्रनाथ, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा. योगानंद शास्त्री, चौधरी प्रेम सिंह, सुभाष चोपड़ा जैसे बड़े-बड़े नाम शामिल हैं.

विधानसभा चुनाव 2013 में चली आम आदमी पार्टी की आंधी से शीला दीक्षित युग का अंत कर दिया था, तो 2015 में कांग्रेस की एक सीट भी विधानसभा में नहीं बची. कांग्रेस के पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान, मुस्तफाबाद से प्रत्याशी हसन अहमद, बादली से देवेंद्र यादव, मटिया महल से शोएब इकबाल दूसरे नंबर पर रहे. ये कांग्रेस के वो गिने-चुने चेहरे हैं जो दूसरे नंबर पर रहे, बाकी ज्यादातर कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहे.

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सीलमपुर से उम्मीदवार चौधरी मतीन अहमद, चांदनी चौक से प्रह्लाद सिंह साहनी, जंगपुरा से तरविंदर मारवाह और लक्ष्मी नगर से डॉ. एके वालिया को जमानत बचाने लायक वोट मिल गए. दिल्ली चुनाव में कांग्रेस की हालात इतनी खराब रही कि दिल्ली की पूर्व मंत्री प्रो. किरण वालिया को सिर्फ 4781 वोट मिले. कांग्रेस ने विधानसभा में सीट संख्या बढ़ाने के लिए पांच बार के मटिया महल से विधायक शोएब इकबाल को पार्टी में शामिल कराया, इस बार उनका रिकॉर्ड भी खराब हो गया और वे भी हार गए.

इसके अलावा पांच बार के विधायक हारून यूसुफ, चौधरी मतीन अहमद का सिक्सर नहीं मार सके. कांग्रेस के परंपरागत मुस्लिम और एससी वोटर्स ने पूरी तरह से मुंह मोड़ लिया. कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन को सिर्फ 16331 वोट मिले, जबकि जमानत बचाने के लिए 19455 वोट की जरूरत थी. पांच बार के विधायक व पूर्व मंत्री हारून यूसुफ भी तीसरे नंबर पर रहे हैं. जमानत बचाने को इन्हें 15.5 हजार वोट की जरूरत थी, लेकिन 13552 वोट ही मिले.