नौकरशाहों व अन्य से सहयोग नहीं मिला, फेल नहीं हुआ हूं: हरीश रावत

हाल ही में उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार ने एक साल पूरा किया है. रावत की सरकार के एक साल के कार्यकाल की मीडिया में काफी आलोचना हो रही है. अब स्वयं हरीश रावत ने इस मामले में सफाई दी है. उनका कहना है कि नौकरशाहों और अन्य के असहयोग के चलते योजनाएं परवान नहीं चढ़ पायीं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि मैं फेल हो गया.

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पहले कौन सी बड़ी सफलता मिल रही थी. उन्होंने कहा, सरकार ने राज्य के हित में ऐसी बहुत सी योजनाओं की पहल की है जो दीर्घकालिक लक्ष्य को लेकर बनी हैं. यह भी जरूरी नहीं है कि उसका परिणाम उसी समय दिखे. मुख्यमंत्री सोमवार को मीडिया से रूबरू हुए.

हरीश रावत ने मीडिया की खबरों पर कहा कि ये आलोचना नहीं अन्याय है, उन्होंने मूल्यांकन के लिए सुझाव दिया कि संकीर्ण दृष्टिकोण से न देखकर उनकी पहल को देखें जो उससे पहले राज्य में शुरू ही नहीं हुई. किसी को तो पहल करनी ही थी. उन्होंने माना कि शीतकालीन चारधाम यात्रा में लोग कम आए, लेकिन सरकार सुरक्षित उत्तराखंड का मैसेज देना चाहती थी. उन्होंने कहा, इसके बावजूद ऊखीमठ, जोशीमठ और मद्महेश्वर तक लोग पहुंचे.

हिमालय दर्शन सेवा एक-दो साल में परवान नहीं चढ़ेगी, लेकिन इसके जरिए ये आने वालों के लिए एक मार्केट तैयार होगी और राज्य में पर्यटन बढ़ेगा. नए प्रयोग के तौर पर सरकार पांच सौ गांवों को ईको विलेज के तौर पर विकसित करेगी. उन्होंने कहा कि चिकित्सा-शिक्षा की दिक्कतें आज की नहीं है. इस मुद्दे को सरकार ने गंभीरता से लिया है. कई बार सहयोग नहीं मिल पाता है और ऐसी खबरों से अधिकारियों को बहाना मिलता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में अटके फ्लाईओवर योजना की शुरुआत ही अपरिपक्व तरीके से की गई थी. जमीन अधिग्रहण किए बिना टेंडर कर दिए गए. इसके बावजूद सरकार ने इस योजना को अंजाम तक ले जाने का काम किया है. उन्होंने कहा, अस्थायी राजधानी में तीन फ्लाईओवर बनाए जाएंगे. एक की प्रगति अच्छी है, दूसरे पर जल्द ही काम शुरू होगा, जबकि तीसरे के लिए तरीका खोज रहे हैं. इसे मेरी सरकार की गलती नहीं माना जा सकता.

सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने 32 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. गड़बड़ी पर कई विभागाध्यक्षों को हटाया गया है. स्वास्थ्य विभाग में बिल घोटाले में कार्रवाई पर देरी होने पर सीएम ने कहा कि विभाग की जिम्मेदार है. मैंने पूछा है कि क्यों देरी हो रही है. ऐसे बहुत सारे मुद्दे उठते हैं इसमें सीएम का पूरा दायित्व नहीं है.

हरीश रावत ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं को नीति के दायरे में लाए हैं. खनिज को लेकर एक-दो महीने में नीति बना लेंगे. खनिज का निस्तारण नीलामी आधारित होगा इस पर होमवर्क पूरा कर लिया गया है. मलिन बस्तियों के मामले उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही मलिन बस्तियों के नियमितीकरण पर फैसला लेगी. राज्य में कोई भी भूमिहीन नहीं रहेगा, भले ही उसे आवास के लिए जमीन का छोटा टुकड़ा ही मिले. इस पर काम शुरू कर दिया गया है.

सीएम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा कर उन्हें हटाएंगे. हालांकि उन्होंने कहा कि यह सवाल आगे सुझाव के लिए ठीक है. उल्लेखनीय है कि सीएम ने कार्यकाल संभालने पर कहा था कि एक साल मंत्रियों का कामकाज देखने के बाद समीक्षा करेंगे.