बिहार में बवाल, मांझी बोले- नीतीश का असली चेहरा आया सामने

बिहार की सियासत में शनिवार को भूचाल आ गया. मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बागी होने के बाद सत्ताधारी पार्टी जेडीयू के अंदर गृहयुद्ध की स्थिति बनी हुई है. जीतनराम मांझी द्वारा राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से विधानसभा भंग करने की अनुशंसा के बाद हुई जेडीयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुना गया है. इसके बाद नीतीश खेमे के 20 मंत्रियों ने मांझी कैबिनेट से भी इस्तीफा दे दिया.

इस सियासी घमासान के बीच मांझी नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के लिए शनिवार शाम दिल्ली पहुंच गए. खबरिया चैनल आज तक के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सत्ता पाने के लिए उतावले हो गए हैं. उनका असली चेहरा सामने आ गया है. उन्होंने कहा, ‘नीतीश को विधायक दल का नेता चुना जाना गलत है. जिन मंत्रियों के इस्तीफे की बात कही जा रही है असल में उन्हें बर्खास्त किया गया है. मैं अभी भी मुख्यमंत्री हूं, मुझे राज्यपाल ने बर्खास्त नहीं किया है.’

नीतीश कुमार के विधायक दल के नेता चुने जाने के तुरंत बाद बिहार सरकार से 20 मंत्रियों के इस्तीफे की खबर आई. जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने कहा, ’20 मंत्रियों ने मांझी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. जबकि दो को पहले ही बर्खास्त कर दिया गया था.’

नीतीश कुमार का एक बार फिर से बिहार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है. जेडीयू ने मांझी को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया है. विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि मांझी बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे थे. जेडीयू के खिलाफ साजिशें हो रही थीं. मांझी पार्टी की अनदेखी कर रहे थे. इसलिए मैं आप सबकी बात मानता हूं और मैं सामने से नेतृत्व करने में विश्वास रखता हूं.

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारे पास संख्या बल है और जरूरत पड़ी तो सभी विधायकों की परेड भी करा देंगे. उधर मुख्यमंत्री मांझी ने राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाथी से विधानसभा भंग करने की सिफारिश की है. दरअसल, शनिवार को मांझी द्वारा बुलाई गई कैबिनेट बैठक में उनके समर्थक मंत्री नरेंद्र सिंह ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव के समर्थन में 7 मंत्री थे, जबकि 22 मंत्रियो ने इसका विरोध किया था.