उत्तराखंड में टीचर्स की भारी कमी, ‘भविष्य’ से खि‍लवाड़ कर रही सरकार

साल 2014 में राज्य सरकार ने 20 नए महाविद्यालय खोलकर अपनी जिम्मेदारी से तो पल्ला झाड़ लिया. लेकिन उच्च शिक्षा के प्रति उसकी बेरुखी और असफलता जग जाहिर है. यही बेरुखी एक बार फिर सामने आयी है.

राज्य में चल रहे 90 राजकीय महाविद्यालयों में टीचरों को आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार नई भर्ती करने को बिल्कुल भी तैयार नहीं है. RTI कार्यकर्ता नदीमुद्दीन एडवोकेट की ओर से मांगी गई सूचना में यह बात सामने आई है.

90 सरकारी महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं के कुल 1656 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 971 पद खाली हैं. हालांकि, 408 संविदा टीचर्स को नियुक्त किया गया है, लेकिन हालात बताते हैं कि यह व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही. वहीं 563 पद ऐसे हैं जिन पर संविदा टीचर्स भी नहीं हैं.

इसके अलावा राज्य में 20 प्रवक्ता ऐसे भी सामने आए हैं, जो महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य नहीं कर रहे हैं. इनमें से दो तो
प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं. बाकी लंबे समय से अनुपस्थित हैं. इन पदों को भी जोड़ लिया जाए तो कुल 583 पदों पर कोई भी टीचर नहीं है.

971 रिक्त पदों में सबसे ज्यादा 95 अंग्रेजी विषय के हैं. फिजिकल साइंस, टूरिज्म, दर्शनशास्त्र तथा पत्रकारिता विषय का कोई पद रिक्त नहीं है.

इसके अलावा ये पद रिक्त हैं.
हिंदी के 85
संस्कृत के 44
भूगोल के 45
अर्थशास्त्र के 74
राजनीतिक शास्त्र के 81
समाजशास्त्र के 61
इतिहास के 52
शिक्षा शास्त्र के 18
मनोविज्ञान के सात
शारीरिक शिक्षा के छह
गृह विज्ञान के 15
सैन्य विज्ञान के नौ
बीएड के 15
संगीत के पांच
सांख्यिकी के तीन
भूगर्भ विज्ञान के आठ
विधि के पांच
चित्रकला के तीन
बेसिक हयूमेनेटिज का एक
मानव विज्ञान के दो
बेसिक साइंस का एक
भौतिक विज्ञान 53
रसायन विज्ञान 58
जंतु विज्ञान 50
वनस्पति विज्ञान 51
गणित 44
वाणिज्य 62
बीबीए तीन
बीसीए छह
एमबीए पांच
बीटीएस एक
कंप्यूटर विज्ञान के तीन

गढ़वाल में ज्यादा परेशानी
गढ़वाल मंडल के कुल 48 सरकारी महाविद्यालयों में कुल 835 स्वीकृत पदों में से 524 खाली हैं. इनमें से 210 पदों पर संविदा शिक्षक कार्यरत हैं. जबकि संविदा शिक्षकों के पदों को छोड़कर भी 314 पदों पर कोई शिक्षक कार्यरत नहीं है.

इसी प्रकार, कुमाऊं मंडल के कुल 42 सरकारी महाविद्यालयों में कुल 821 पदों में से 354 पदों पर ही नियमित प्रवक्ता कार्यरत है. शेष 467 पद खाली हैं. इनमें से केवल 198 पदों पर संविदा शिक्षक कार्य कर रहे हैं. जबकि संविदा शिक्षकों के पदों को छोड़कर भी 269 पद रिक्त हैं, जिस पर कोई शिक्षक कार्य नहीं कर रहा है.