राष्ट्रीय स्कीईंग चैंपियनश‍िप का मौका गंवाया, अब कार्निवाल को सफल बनाना भी चुनौती

देहरादून।… औली में राष्ट्रीय स्कीईंग चैपिंयनश‍िप के आयोजन का सुनहरा मौका गंवाकर उत्तराखंड सरकार ने अपनी अच्छी-खासी फजीहत तो कर ही ली है. इस फजीहत से कुछ हद तक पार पाने की कोश‍िश में विंटर स्की कार्निवाल और ओपन चैंपिंयनश‍िप के आयोजन का फैसला किया गया, जो किसी भी हालत में कम चुनौतीपूर्ण नहीं है.

प्राकृतिक आपदा के सदमे से पर्यटन उद्योग को उबारने में सरकार की यह पहल भी आसान नहीं. कारण साफ है, जिस समय सरकार ने ऑली में विंटर कार्निवाल व ओपन चैंपियनश‍िप के आयोजन का फैसला किया है, ठीक उसी वक्त जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में राष्ट्रीय स्कीईंग चैंपियनश‍िप का आयोजन किया जा रहा है. तारीखों के इस टकराव के कारण सरकार के लिए औली में स्कीईंग के बेहतरीन ख‍िलाड़‍ियों और पर्यटकों की भीड़ जुटा पाना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.

उत्तराखंड के लिए यह पहला सुनहरा मौका था जब विंटर गेम्स फैडरेशन ऑफ इंडिया ने औली में न सिर्फ राष्ट्रीय स्कीईंग चैंपियनशिप, बल्कि उसके सीनियर और जूनियर वर्गों के इवेंट कराने की भी सहमति दे दी थी. जून 2013 में दैवीय आपदा से हुई भीषण तबाही (खासकर केदारनाथ में) के बाद उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग जिस तरह ठप पड़ा हुआ है, उसे देखते हुए भी इस नेशनल चैंपियनशिप को लेकर राज्य की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच गई थीं. खासतौर पर पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कारोबारी नेशनल चैंपियनशिप के जरिए पर्यटन व्यवसाय को नई संजीवनी मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे.

उत्तराखंड के हाथ से यह मौका फिसला तो जम्मू-कश्मीर ने इसे हाथों-हाथ लिया. अब 21 से 27 फरवरी तक जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में इस चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है. वहीं, उत्तराखंड सरकार ने 22 से 25 फरवरी तक औली में विंटर कार्निवाल व ओपन चैंपियनशिप कराने का फैसला किया है. इन दोनों आयोजनों की तारीखों के क्लैश की वजह से औली में स्कीईंग के उम्दा खिलाड़ियों व पर्यटकों की भीड़ जुटने पर बड़े से बड़े आशावादी को भी आशंका है. ऐसे में कार्निवाल व ओपन चैंपियनशिप की सफलता भी पर्यटन विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित होने जा रही है.