विलुप्त हो रही उत्तराखंड की हस्तकला कला अब आजीविका से जुड़ेगी

देहरादून।… उत्तराखंड में तेजी से विलुप्त हो रही हस्तशिल्प कला को जीवित रखने के लिए अब प्रयास होने लगे हैं. अब इसे रोजगार और आजीविका से जोड़ने की तैयारी की जा रही है. अल्मोड़ा में हरिप्रसाद टम्टा संस्थान के जरिए सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है.

मंगलवार को विधानसभा में हरिप्रसाद टम्टा परंपरागत शिल्प उन्नयन संस्थान प्रबंध परिषद की बैठक हुई. इस बैठक की अध्यक्षता राजस्व मंत्री यशपाल आर्य ने की और कहा कि उत्तराखंड की विलुप्त हो रही हस्तशिल्प कला को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है.

पिछड़े समाज को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सरकार हरिप्रसाद टम्टा के नाम से एक संस्थान अल्मोड़ा के गुरुड़ाबाज क्षेत्र में खोलने जा रही है. यहां उत्तराखंड में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य हस्त शिल्पकारों को इस संस्थान में ट्रेनिंग देकर रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि इसके लिए बजट भी मंजूर कर लिया गया है, अगले बजट में भवन निर्माण के कार्यों को मंजूरी दी जाएगी.

बैठक में प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु उद्योग एमएच खान ने बताया कि इस संस्थान में तकरीबन 16 विभाग होंगे, जिसमें हस्तकला एवं तांबे के वाद्य यंत्रों व अन्य कलाओं को श्रेणीवार अलग-अलग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प की आमदनी को बढ़ाने के लिए यह संस्थान कार्य करेगा. इस संस्थान का शोध का कार्य अलग होगा. उन्होंने कहा, अगले वित्तीय वर्ष से इस संस्थान में ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा.