अपने घर में भी मिलेगी रोजी रोटी, बनेंगे सौ ‘स्मॉल एंड स्मार्ट टाउन’

देहरादून।… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना के तहत देशभर में सौ शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है. अब केंद्र सरकार की इस योजना के ही तर्ज पर उत्तराखंड सरकार ने भी कदम बढ़ा दिए हैं. इस कड़ी में राज्य सरकार उत्तराखंड के सौ छोटे शहरों एवं कस्बों को ‘स्मॉल एंड स्मार्ट टाउन’ के रूप में संवारने की तैयारी कर रही है. कह सकते हैं अब घर छोड़कर जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि अपने अब घर में भी रोटी मिलेगी.

राज्य सरकार चाहती है कि पहाड़ की जवानी यहां के काम आए और इसके लिए पलायन पर अंकुश लगाना जरूरी है. पलायन पर अंकुश लगाने के मकसद से स्मार्ट टाउन में रोजगार के संसाधनों की समुचित व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा अन्य आधुनिक सुविधाएं भी वहां उपलब्ध होंगी.

उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार लग रहा है कि सरकार छोटे शहरों व कस्बों की तरफ ध्यान दे रही है. देर से ही सही, लेकिन सूबे के 100 छोटे शहर-कस्बे अब स्मार्ट टाउन बन सकेंगे. भले ही यह पहल केंद्र की स्मार्ट सिटी योजना के बाद शुरू हुई हो, लेकिन पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन के चलती उपजी चिंता इसके मूल में है.

खासकर, पहाड़ी इलाकों के गांव खाली हो रहे हैं और यहां के छोटे शहर व कस्बे भी इससे अछूते नहीं हैं. पहाड़ों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है और छोटे शहरों व कस्बों की सूरत भी खास अच्छी नहीं है. सरकार की कोश‍िश है कि इन स्मार्ट टाउन में भी उसी तरह की सुविधाएं उपलब्ध हों, जैसी बड़े शहरों में होती हैं.

rawat_bayanइन स्मार्ट टाउन में रोजगार के अवसर भी सृजित किए जाएंगे. इससे स्थानीय स्तर पर सुविधाओं के विकास व रोजगार मिलने से पलायन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. इसके मूल में तर्क यह है कि जब अपने घर में भरपेट रोटी मिलगी तो कोई दूसरे के घर इसकी मांग करने क्यों जाएगा. सरकार की बात मानी जाए तो इस दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है और जल्द ही इस योजना को धरातल पर मूर्त रूप दे दिया जाएगा.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं, ‘समूचे उत्तराखंड में सौ ‘स्मॉल एंड स्मार्ट टाउन’ विकसित करने का प्रस्ताव जल्द केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, अनुमति मिलते ही इस पर पूरी तैयारी से कार्य शुरू कर दिया जाएगा. इन्हें इस तरह तैयार किया जाएगा कि ये पलायन रोकने के केंद्र के रूप में कार्य करें. ये राज्य की भावी आय का आधार बनेंगे और रोजगारमूलक भी होंगे. हमारा प्रयास है कि छोटे-छोटे कस्बों को पहले नगर पंचायत बनाया जाए और फिर इस योजना में शामिल किया जाए. इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, वैसे हम अनौपचारिक रूप से इसकी शुरुआत गैरसैंण से कर चुके हैं.’

राज्य की प्रशासनिक इकाइयों पर डालें एक नजर

जिले 13
तहसील 99
उप तहसील 7
नगर निगम 6
नगर पालिका परिषद 32
नगर पंचायत 46
विकासखंड 95
न्याय पंचायत 670