बहुगुणा के ‘लैटर बम’ का CM हरीश रावत ने दिया जवाब, आप भी पढ़ें

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और अपने वरिष्ठ सहयोगी विजय बहुगुणा की चिट्ठी का लिखित जवाब दिया है. उन्होंने बहुगुणा को लिखी चिट्ठी में वर्ग-4 और श्रेणी 1-ख की भूमि के विनियमितीकरण के बारे में उठाए गए उनके एक-एक बिन्दू पर अपनी भावनाएं समझाते हुए स्थायी समाधान का आश्वासन दिया है.

मुख्यमंत्री ने अपनी चिट्ठी में लिखा, ‘आपको सूचित करने में खुशी हो रही है कि हम वर्ग-4 की भूमि के स्थायी समाधान का प्रस्ताव अगली मंत्रिमंडल की बैठक में ला रहे हैं. इससे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा ने हरीश रावत को चिट्ठी भेजकर इस मसले का समाधान न होने पर 15 फरवरी को जनाक्रोश रैली करने की चेतावनी दी थी.

हरीश रावत ने चिट्ठी में इस बात भी उल्लेख किया है कि अगर अकस्मात कारणों से 31 जनवरी को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित नहीं हुई होती तो यह मामाला संभवत: अब तक निपट गया होता. मुख्यमंत्री ने चिट्ठी के अंत में उम्मीद जताई है कि बहुगुणा का महत्वपूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन हमेशा की तरह उन्हें मिलता रहेगा.

हरीश रावत ने लिखा है कि पूर्व सरकारों ने इस विषय पर कई बार निर्णय लिया, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया को जन स्वीकार्यता नहीं मिल सकी. वर्ग-4 की भूमि के विनियमितिकरण की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो पाई. उन्होंने लिखा कि आप सहमत होंगे कि किसी भी जनोपयोगी योजना के तहत जनस्वीकार्य प्रावधानों में कुछ समय लगना स्वाभाविक है. श्रेणी 1 ख का विषय भी आपने उठाया है, यह अति गंभीर और संवेदनशील विषय है. इसका प्रभाव राज्य की आर्थिक, सामाजिक और कानून व्यवस्था से जुड़ा है.

आपके संज्ञान में यह तथ्य लाना चाहता हूं कि श्रेणी 1 ख में ऐसी भूमि हैं जो विभिन्न उद्देश्यों तथा प्रयोजनों के लिए विभिन्न श्रेणी के खातेदारों को अलग-अलग परिस्थितियों में सरकार ने दी है. चिट्ठी में लिखा है कि आप सहमत होंगे ऐसे गंभीर व जटिल विषय पर निर्णय लेने से पहले व्यापक कानूनी, व्यावहारिक, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं का परीक्षण कर लिया जाए.

उन्होंने आगे लिखा, कई मामले पहले से अदालतों में विवादग्रस्त हैं. मैंने इस गंभीर विषय पर व्यक्तिगत तौर पर कई बार अध्ययन कर आपके नेतृत्व में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्राविधानों को तय करने के निर्देश दिए हैं. मेरा यह प्रयास होगा कि इस अतिसंवेदनशील विषय पर व्यापक विचार विमर्श कर राज्य के हित में उचित विधिक निर्णय यथाशीघ्र लूंगा.