विशेष दर्जे को लेकर उत्तराखंड सरकार की केंद्र से बढ़ सकती है तकरार

देहरादून।… योजना आयोग का अस्तित्व खत्म होने के बाद नए बने नीति आयोग के साथ उत्तराखंड की तकरार बढ़ सकती है. खासतौर पर राज्य को मिले विशेष दर्जे पर केंद्र सरकार की ओर से कैंच चलने की स्थ‍िति में ऐसा हो सकता है. शुक्रवार को राज्य के नीति नियोजन समूह (पीपीजी) की पहली बैठक में विरोध के स्वर मुखर होने के संकेत दिखाई दिए.

उत्तराखंड ने इस ग्रुप के जरिए अपनी जरूरतों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति की ओर कदम बढ़ा दिए हैं. बैठक में कई वक्ताओं ने ग्रीन बोनस और वनों पर केंद्र के समान ही राज्य के हक-हकूक की पुरजोर पैरवी की. उधर, इस ग्रुप को गठित कर सरकार ने अपने ऊपर भी बेहतर प्रदर्शन का दबाव बढ़ा दिया है.

केंद्रीय नीति आयोग की पहली बैठक फरवरी के पहले हफ्ते में प्रस्तावित है. इस बैठक से पहले ही राज्य की कांग्रेस सरकार ने नीति नियोजन समूह की पहली बैठक के साथ ही अपना एजेंडा तय कर दिया है. नीति आयोग के सदस्य की हैसियत से मुख्यमंत्री हरीश रावत इस एजेंडे को सामने रख सकते हैं. राज्य सरकार को अंदेशा है कि नीति आयोग के जरिए उत्तराखंड को केंद्र से मिले खास दर्जे को खटाई में डाला जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खास दर्जे पर केंद्र ने कदम पीछे खींचे तो अन्य हिमालयी राज्यों को साथ लेकर दबाव बनाया जा सकता है. इस मामले में उत्तराखंड अन्य राज्यों से बात कर सकता है.

कांग्रेस पहले से ही योजना आयोग को भंग किए जाने से खफा है. राज्य सरकार पीपीजी के जरिए एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश में जुटी है. पीपीजी में वक्ताओं ने नीति नियोजन के विकेंद्रीकरण पर जोर दिया. उन्होंने नीति नियोजन राज्य के साथ ही जिस तरह जिलों के स्तर पर किए जाने का मुद्दा उठाया, उसके सियासी निहितार्थ तलाश किए जाने लगे हैं. हालांकि, मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार और केंद्र में विरोधाभास को नकार भी दिया.

पीपीजी को लेकर राज्य सरकार के इस कदम के बाद खुद सरकार पर भी महत्वपूर्ण सुझावों को नीति नियोजन से जोड़ने का दबाव भी बढ़ गया है. पीपीजी की बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि राजनीतिक समेत विभिन्न स्तरों पर बनने वाले दबावों के चलते महत्वपूर्ण नीति पर अमल करने से सरकार अक्सर कन्नी काट रही है. पीपीजी की मुहिम सरकार के मजबूत इच्छाशक्ति रखने पर ही परवान चढ़ सकती है. इस कसौटी पर सरकार को भी राज्य के भीतर अग्नि परीक्षा देनी होगी.