पिथौरागढ़ के मेले और धार्मिक आयोजन

समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पिथौरागढ़ करीब 500 वर्षों तक कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा जिले का हिस्सा रहा है. यहां के मेले, धार्मिक आयोजन और कौतिक अल्मोड़ा जिले से काफी मिलते-जुलते हैं. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण यहां राजाओं द्वारा शुरू किए गए कई धार्मिक अनुष्ठान और मेले आज भी आयोजित होते हैं.

देवीधुरा का मेला या बग्वाल:
देवीधुरा में वरही देवी मंदिर के आंगन में लगने वाला यह मेला हर साल रक्षाबंधन के दिन होता है. देवीधुरा में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों का तिराहा है. यह मेला अपने मोहक लोकगीतों, डांस और बग्वाल के लिए दुनियाभर में मशहूर है. मेले में लोग दो गुटों में बंट बंटकर एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं और खुद को बचाने के लिए बड़ी-बड़ी शील्डों का इस्तेमाल करते हैं. बग्वाल देखने का अनुभव सच में रोमांचक होता है.
आयोजन कब और कहां: इस मेले (बग्वाल) का आयोजन देवीधुरा में रक्षाबंधन के दिन वरही देवी मंदिर में होता है.
कितने दिन का आयोजन: रक्षाबंधन के दिन होने वाला यह मेला सिर्फ एक दिन के लिए लगता है.
कितनी दूर: देवीधुरा दिल्ली से करीब 270 किमी, अल्मोड़ा से करीब 90 किमी, पिथौरागढ़ से करीब 182 किमी और नैनीताल से मात्र 11 किमी दूर है.

मस्तमानू मेला:
पिथौरागढ़ के पास ही सड़क से करीब 2 किमी पैनल जाने पर मस्तमानू मंदिर परिसर है. यहां दर्शन करके स्थानीय लोग खुद को धन्य मानते हैं.
आयोजन कब और कहां: हर साल अगस्त-सितंबर में यहां मेले का आयोजन होता है.
कितनी दूर: पिथौरागढ़ शहर से करीब 8 किमी और चंडक से करीब 2 किमी दूर मस्तमानू मंदिर परिसर में होता है मेले का आयोजन.