रानीखेत: 169 जांबाजों ने ली देश सेवा की कसम

रानीखेत।… सरहद की हिफाजत और देश की आन, बान व शान की सुरक्षा की कसम लेने के साथ ही 169 रिक्रूट भारतीय सेना के अभिन्न अंग बन गए. मुख्य अतिथि मेजर जनरल अमरीक सिंह (सेना मेडल, डीजी री-सेटलमेंट सेना मुख्यालय) ने जांबाजों में जोश भरते हुए आह्वान किया कि हर सैनिक भारत माता की सेवा को तत्पर रहे.

भारतीय सेना का ऐतिहासिक सोमनाथ ग्राउंड केआरसी की गौरवशाली सैन्य परंपरा का एक बार फिर गवाह बना. कठिन ट्रेनिंग के बाद सेना का अभिन्न अंग बने 169 रिक्रूटों को धर्मगुरु सूबेदार मेजर एमसी लोहनी ने राष्ट्रीय ध्वज व महाग्रंथ गीता को साक्षी मान इन जांबाजों को देश की आन, बान व शान की सुरक्षा को तत्पर रहने की कसम दिलाई.

मार्चपास्ट की सलामी लेने के बाद मुख्य तिथि मेजर जनरल अमरीक सिंह ने कहा, केआरसी भारतीय सेना की पराक्रमी रेजीमेंट गौरवशाली रेजिमेंट है. भारतीय सेना का पहला परमवीर चक्र तथा देश को तीन ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ’ (थल सेनाध्यक्ष) देने का गौरव केआरसी को ही है. इससे पहले मुख्य अतिथि ने युद्ध स्मारक पर फूल चढ़ाकर शहीद जांबाजों को सलामी दी.

‘कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा..’ की बैंड धुन पर जांबाज सैनिकों के कदम जैसे-जैसे आगे बढ़े, मौजूद सैनिक परिवार और ऐतिहासिक सोमनाथ ग्राउंड के चारों ओर कसम परेड देखने उमड़े सैलाब में भी देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा जाग उठा. राष्ट्रभक्ति की ऐसी प्रेरणा कि सैनिकों का कदमताल देश के लिए सब कुछ न्यौछावर करने की प्रेरणा दे रहा था.

देशभक्ति की सोच के साथ जुनून व जज्बा लिए सैनिकों का चौड़ा सीना हर एक को गौरवान्वित कर रहा था. समारोह को देखनेपहुंचे सिविलियन खासतौर पर युवाओं में भी सेना के जरिए देश सेवा के लिए आगे आने की प्रेरणा मिल रही थी. परेड एड्जुटेंट कैप्टन भारतेश एसएच, परेड कमांडर सिपाही दीपक सिंह, सिपाही दीपक नेगी, सिपाही हरीश सिंह, सिपाही प्रकाश धामी व सिपाही मनीष सिंह की अगुवाई में सैनिकों ने भव्य मार्च पास्ट किया.

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कुमाऊं रेजिमेंट की सैन्य परंपरा के मुताबिक सेना के अंग बने जांबाजों के परिजनों को गौरव मेडल से नवाजा गया. वहीं ट्रेनिंग के दौरान विभिन्न गतिविधियों में अव्वल रहने वाले चार रिक्रूट्स को उत्कृष्ट मेडल से सम्मानित किया गया. इनमें सिपाही सूरज चंद, प्रभात सिंह, हनुमान सिंह तथा दीपक गिरी शामिल हैं.

कसम परेड में जिगर के टुकड़ों को भारत माता के लिए समर्पित करने पहुंचे जांबाजों के माता-पिता का सीना यहां गर्व से चौड़ा हो गया. आंखों से टपकते फख्र के आंसू अपने लाडलों को देश सेवा और सीमा की हिफाजत के लिए डटे रहने का हौसला भी दे रहे थे.