देहरादून ज़‍िले के मेले और धार्मिक आयोजन

देहरादून उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी है और यहां साल भर सरकारी गतिविधियां चलती रहती हैं.

स्कंद पुराण के अनुसार यह जिला केदारखंड का हिस्सा था. जिले का इतिहास बहुत ही रोचक घटनाओं से भरा पूरा है. इसके अलावा यहां धार्मिक स्थान भी उत्तराखंड के किसी भी अन्य जिले से कम नहीं हैं. यहां धार्मिक स्थानों पर एक से बढ़कर मेलों का आयोजन होता है.

झंडा मेला (जनता मेला):
होली के पांच दिन बाद हर साल देहरादून में सिखों के आध्यात्मिक गुरु की याद में इस मेले का आयोजन होता है. मेला देहरादून के एतिहासिक गुरु राम राय दरबार में होता है.

टपकेश्वर मेला:
टोंस नदी के पूर्वी छोर पर बसा टपकेश्वर मंदिर आध्यात्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थान है. यह गुफा भगवान श‍िव शंकर को समर्पित है. स्कंद पुराण के अनुसार इस जगह को उस समय देवेश्वर कहा जाता था.
कितनी दूर: टपकेश्वर महादेव का मंदिर देहरादून शहर में ही है. यह बस स्टैंड से सिर्फ 5 किमी जबकि रेलवे स्टेशन से 5.5 किमी दूर है. यहां के लिए सिटी बस और थ्री व्हीलर चलते रहते हैं.
क्यों जाएं: महाभारत युद्ध के एक महान योद्धा और आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वथामा का जन्म यहीं पर हुआ था.  श‍िवरात्रि के मौके पर यहां एक बड़े मेले का आयोजन होता है. श‍िवरात्रि पर हजारों की संख्या में श्रृद्धालु यहां आकर भगवान श‍िव शंकर की अराधना करते हैं इसके अलावा साल के अन्य दिनों में भी यहां भक्त आते रहते हैं.

लक्ष्मण सिद्ध मेला:
देहरादून के आसपास 4 सिद्ध पीठों में से एक लक्ष्मण सिद्धपीठ भी है. इस सिद्धपीठ का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है. यहां साप्ताहिक तौर पर मेले का आयोजन होता है.
कितनी दूर: लक्ष्मण सिद्ध पीठ देहरादून से ऋष‍िकेश के रास्ते में करीब 10 किमी दूर है.
क्यों जाएं: यहां साल भर हर रविवार को मेले का आयोजन होता है. लेकिन हर साल अप्रैल के अंतिम रविवार को लगने वाला मेला खास होता है. इस दिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु समाधि‍ पर श्रृद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचते हैं.

बिस्सू मेला:
यह मेला देहरादून जिले के चकराता खंड में बिस्सू मेला कैंट इलाके में झंडा ग्राउंड में आयोजित होता है.
कितनी दूर: यह मेला स्थल चकराता शहर से करीब 3 किमी दूर है.
क्यों जाएं: यह मेला जौनसार इलाके की सांस्कृतिक विरासत और रिवाजों का प्रमुख केंद्र है. इस मेले में शामिल होने के लिए टिहरी, उत्तरकाशी और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं.

महासू देवता मेला:
महासू देवता का मेला हर साल अगस्त में आयोजित होता है. इस दौरान यहां के ईष्ट देवता महासू को मंदिर से बाहर लाया जाता है.
कितनी दूर: महासू देवता मेला चकराता-त्यूनी रोड पर चकराता से करीब 120 किमी दूर हनोल में आयोजित होता है.
क्यों जाएं: तीन दिन तक चलने वाले इस मेले की खास बात ये है कि यहां यज्ञ के लिए भारत सरकार की ओर से यज्ञ सामग्री मुहैया कराई जाती है. यह जौनसारी जनजाति का स्थानीय मेला है.

शहीद वीर केसरी चंद्र मेला:
देहरादून जिले में चकराता ब्लॉक के नौगांव ग्राम सभा में इस मेले का आयोजन होता है. मेले के आयोजन स्थल का नाम रामताल है.
क्यों जाएं: रामताल एक प्राकृतिक झील है और यह करीब 30 मीटर लंबी व 30 मीटर चौडी भी है. यह एक पहाड़ के ऊपर है और यहां तक पहुंचने के लिए 700 मीटर लंबा सड़क मार्ग है. इस झील के आसपास सुंदर हरा-भरा मैदान है और इसी मैदान में मेले का आयोजन होता है.