निठारी कांड: कोली को नहीं होगी फांसी, HC ने उम्रकैद में बदली सजा

नोएडा के निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की फांसी पर इलाहाबाद हाइकोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी. कोली को मेरठ जेल में 12 सितंबर 2014 को फांसी देने की तैयारी थी. लेकिन, SC की ओर से जारी आदेश के बाद कोली की फांसी टल गई थी.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार जीवन के अधिकार के खिलाफ करार दिया है. अदालत ने पहले जारी डेथ वारंट को भी असंवैधानिक करार दिया और कहा कि कैदी को अकेले में रखना सुप्रीम कोर्ट के फैसलों एवं संवैधानिक अधिकारों के विपरीत था.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि कोली की दया याचिका पर फैसला लेने में राज्य सरकार ने बहुत देर की. इसी आधार पर उसकी फांसी की सजा बदलने के लिए याचिका भी दाखिल थी. इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली भी कठघरे में थी. मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई थी और बुधवार को मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने खुली अदालत में फैसला लिखाया.

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कोली द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पुनर्विचार अर्जी की वजह से दया याचिका के निस्तारण में देरी हुई. कोर्ट ने कहा कि अर्जी के आधार पर देरी का तर्क भ्रामक है, क्योंकि अर्जी का दया याचिका से कोई संबंध नहीं था. प्रदेश के गृह विभाग ने पहले यह कहा कि उसे इस मामले में क्षेत्राधिकार नहीं है पर इसके बाद प्रमुख सचिव, गृह ने याचिका निरस्त करने के लिए राज्यपाल को संस्तुति भी कर दी, जबकि यह काम कानून मंत्रालय का था.

इसके अलावा कोर्ट ने साफ कर दिया कि 13 अगस्त, 2005 का शासनादेश कोली के मामले में लागू नहीं होगा. इस शासनादेश में समय पूर्व रिहाई का प्रावधान है.