टिहरी का वर्तमान और इतिहास

टिहरी गढ़वाल दो शब्दों से मिलकर बना है. टिहरी शब्‍द ‘त्रिहरी’ से बना है. इसका अर्थ है ऐसा स्‍थान जो तीन तरह के पाप (मनसा, वाचना, कर्मणा से) धोने का काम करता है. वहीं ‘गढ़’ का अर्थ है किला. इसके पीछे का एक लंबा इतिहास है. 9वीं सदी तक सारा गढ़वाल क्षेत्र छोटे-छोटे राजाओं के अधीन था. जिन्‍हें ‘राणा’, ‘राय’ या ‘ठाकुर’ के नाम से जाना जाता था. माना जाता है कि मालवा के राजकुमार कनकपाल एक बार बद्रीनाथ (जो आजकल चमोली जिले में है) के दर्शन को गए. वहां उनकी मुलाकात राजा भानु प्रताप से हुई. राजा भानु प्रताप उनसे काफी प्रभावित हुए और अपनी इकलौती बेटी का विवाह कनकपाल से करवा दिया साथ ही अपना राज्‍य भी उन्‍हें दे दिया.

इसके बाद कनकपाल और उनके वंशजों ने एक-एक करके सारे गढ़ों को जीतना शुरू कर दिया. इस तरह सन्‌ 1803 तक गढ़वाल क्षेत्र इस वंश के राजाओं के कब्‍जे में रहा. इसी दौरान गोरखाओं के नाकाम हमले (लंगूर गढ़ी को कब्‍जे में करने की कोशिश) भी होते रहे. 1803 में आखिर देहरादून की एक लड़ाई में गोरखाओं की जीत हुई. इस लड़ाई में राजा प्रद्युमन शाह की मौत हो गई, लेकिन उनके बेटे सुदर्शन शाह को उनके वफादारों ने बचा लिया. सुदर्शन शाह की उम्र उस समय बहुत कम थी.

इस लड़ाई के बाद गोरखाओं का प्रभुत्‍व बढ़ता गया और अगले करीब 12 सालों तक उनका क्रूर शासन समूचे उत्तराखंड पर रहा. गोरखाओं का राज्‍य कांगड़ा तक फैला हुआ था. शेर-ए-पंजाब कहे जाने वाले महाराजा रणजीत सिंह ने गोरखाओं को हराकर कांगड़ा पर कब्‍जा कर लिया. इधर अब बड़े हो चुके सुदर्शन शाह ने भी ईस्‍ट इंडिया कंपनी की मदद से गोरखाओं से अपना राज्‍य फिर हासिल कर लिया. ईस्‍ट इंडिया कंपनी ने फिर कुमाऊं, देहरादून और पूर्व (ईस्‍ट) गढ़वाल को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला दिया और पश्‍चिम गढ़वाल राजा सुदर्शन शाह को दे दिया, जिसे बाद में टिहरी रियासत के नाम से जाना गया.

राजा सुदर्शन शाह ने अपनी राजधानी टिहरी या टेहरी शहर को बनाया. उनके उत्तराधिकारियों प्रताप शाह, कीर्ति शाह और नरेन्‍द्र शाह ने इस राज्‍य की राजधानी क्रमशः प्रताप नगर, कीर्ति नगर और नरेन्‍द्र नगर स्‍थापित की. इन तीनों ने 1815 से सन्‌ 1949 तक राज्‍य किया. ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान यहां के लोगों ने भी काफी बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लिया. आजादी के बाद, लोगों के मन में भी राजाओं के शासन से मुक्‍त होने की इच्‍छा प्रबल होने लगी. महाराजा के लिए भी अब राज करना मुश्‍किल होने लगा.

अंत में आजादी के समय 60वें राजा मानवेन्‍द्र शाह ने भारत के साथ विलय की बात स्‍वीकार कर ली. इस तरह सन्‌ 1949 में टिहरी राज्‍य को उत्तर प्रदेश में मिलाकर इसी नाम का एक जिला बना दिया गया. बाद में 24 फरवरी 1960 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी एक तहसील को अलग कर उत्तरकाशी नाम का एक और जिला बना दिया.

आज पुराना टिहरी शहर यहां बनाए गए बांध की झील में डूब गया है. टिहरी बांध भारत का सबसे ऊंचा बांध है और इसे यहां भागीरथी नदी पर बनाया गया है. 1978 में इस बांध का काम शुरू हुआ और इसका पहला फेज 2006 में बनकर तैयार हो गया. इस बांध से 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. यह बांध 52 वर्ग किमी में फैला है. बांध को 8.4 क्षमता के भूकंप के झटके सहने के लिए बनाया गया है.