टूरिज्म मैप पर ये हैं हरिद्वार के नजारे

धार्मिक दृष्टि से हरिद्वार का खास महत्व है. यहां हरिद्वार के अलावा ऋष‍िकेश, गंगा, चंडीदेवी मंदिर, मनसा देवी, माया देवी जैसे तीर्थ स्थान यहां हैं. इसके अलावा यह उत्तराखंड के चारधामों की यात्रा का प्रवेश द्वार भी है.

हिन्दू परम्पराओं के अनुसार, हरिद्वार में पांच तीर्थ गंगाद्वार (हर की पौडी), कुश्वर्त (घाट), कनखल, बिलवा तीर्थ (मनसा देवी), नील पर्वत (चंडी देवी) हैं. पूरे हरिद्वार जिले में सैर-सपाटे के शौकीनों के लिए बहुत कुछ है.

हरिद्वार:

हरिद्वार हिन्दुओं के लिए काफी पवित्र जगह है. लोग यहां अपने पितरों को याद करने आते हैं और घर में कोई मौत होने पर उनकी अस्थ‍ियां यहां गंगा में प्रवाहित की जाती हैं, ताकि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिले और उन्हें जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाए. इसकि इलावा यह एक ऐसा तीर्थ स्थान है, जिसके बारे में कहा जाता है कि हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवन काल में कम से कम एक बार यहां जरूर आना चाहिए. मुख्य रूप से हरिद्वार में लोग धार्मिक पर्यटन के लिए ही आते हैं.

हरिद्वार क्यों जाएं:
हर की पौडी:
हर की पौडी का पवित्र घाट राजा विक्रमादित्य ने पहली शताब्दी ईसा पूर्व में अपने भाई भ्रिथारी की याद में बनवाया था. माना जाता है कि भ्रिथारी हरिद्वार आया था और उसने यहां पतित-पावनी गंगा के तटों पर तपस्या की थी. उसकी मृत्यु के बाद उसके भाई ने उसके नाम पर यह घाट बनवाया, जो बाद में हरी-की-पौड़ी कहलाया जाने लगा. ब्रह्मकुंड हर की पौड़ी का सबसे पवित्र घाट है.

चंडी देवी मंदिर:
कितनी दूर: चंडी देवी मंदिर हरिद्वार से करीब 6 किमी दूर है, जबकि चंडीघाट से यह मंदिर सिर्फ 3 किमी दूर है.
गंगा नदी के पूर्वी किनारे पर ‘नील पर्वत’ की चोटी पर चंडी देवी का मंदिर है. 1929 में कश्मीर के राजा सुचत सिंह ने यह मंदिर बनवाया था. स्कन्द पुराण की एक कथा के अनुसार, स्थानीय राक्षस राजाओं शुम्भ-निशुम्भ के सेनानायक चंड-मुंड को देवी चंडी ने यहीं मारा था, जिसके बाद इस स्थान का नाम चंडी देवी पड़ गया.
रोपवे का समय: सुबह 8.30 से शाम 6 बजे तक

मनसा देवी मंदिर:
कितनी दूर: मनसा देवी मंदिर हरिद्वार से सिर्फ आधे किमी की दूरी पर है.
बिलवा पर्वत के श‍िखर पर मनसा देवी का मंदिर है. मनसा देवी का शाब्दिक अर्थों में मतलब मन की इच्छा (मनसा) पूर्ण करना है. माना जाता है कि मनसा देवी अपने भक्तों की मन की इच्छाओं की पूर्ति करती है.

माया देवी मंदिर:
कितनी दूर: माया देवी का मंदिर हरिद्वार से मात्र आधे किमी की दूरी पर है.
11वीं शताब्दी में बना माया देवी का मंदिर हरिद्वार की अधिष्ठात्री ईश्वर का प्राचीन मंदिर है और यह एक सिद्धपीठ माना जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर देवी सती की नाभि और हृदय यानी दिल गिरा था.

भीमगोडा टैंक:
कितनी दूर: हर की पौडी से भीमगोडा टैंक करीब 1 किमी दूर है
कहा जाता है कि जब पांडव हरिद्वार के रास्ते हिमालय की ओर कूच कर रहे थे तो महाबली भीम ने अपने घुटने से जमीन में यह टैंक बनाया था.

सप्त ऋष‍ि आश्रम और सप्त सरोवर:
कहा जाता है कि इस स्थान पर पतित पावनी गंगा ने खुद को 7 धाराओं में बांट लिया था, जब सात ऋष‍ियों ने यहां पर घोर तपस्या की. इसके बाद इस जगह का नाम ही सप्त ऋष‍ि आश्रम या सप्त सरोवर पड़ गया.

पराड़ श‍िवलिंग:
यह कनखल के हरिहर आश्रम में स्थित है. कहा जाता है कि यहां पर स्थित श‍िवलिंग का वजन करीब 150 किलो है. रुद्राक्ष के पेड़ यहां के मुख्य आकर्षण हैं.
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दक्ष महादेव मंदिर:
दक्ष महादेव का मंदिर काफी पुराना है और यह भगवान श‍िव-शंकर को समर्पित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने यज्ञ किया था.
कितनी दूर: दक्ष महादेव मंदिर हरिद्वार से करीब 4 किमी दूर है.
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पिरान कलियर दरगाह

पिरान कलियर या कलियर शरीफ भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक समभाव का एक आदर्श उदाहरण है. यहां सूफी संत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर (साबिर कलियरी) की मज़ार है. साबिर कलियरी चिश्ती सम्प्रदाय के महान सूफी कवि और संत हज़रत बाबा फ़रीद के उत्तराधिकारी थे. 16वीं सदी में इब्राहीम लोदी ने यहां मज़ार का निर्माण कराया था.
क्यों जाएं: पिरान कलियर में हर साल मई-जून महीने में उर्स का आयोजन होता है. मेले का आयोजन रुड़की के करीब ऊपरी गंग नहर के किनारे जिला मुख्यालय हरिद्वार से बरीब 25 किलोमीटर दूर पिरान कलियर गांव में होता है.
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गुरुद्वारा साहिब श्री गुरु अमर दास जी

सिख पंथ के तीसरे धर्म गुरु संत गुरु अमर दास जी हमेशा ही हरिद्वार और गंगा नदी की तरफ आकर्ष‍ित होते थे. उस समय गुरु अमर दास पंजाब के गोइंदवाल में थे, जब उन्हें पता चला कि हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में सती प्रथा प्रचलित है. वे अपने श‍िष्यों के साथ यहां आए और उन्होंने सैंकड़ों सालों से चली आ रही सती प्रथा का विरोध किया.
क्‍यों जाएं: सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह के कहने पर उनके श‍िष्य दरगाह सिंह ने इस जगह को ढूंढा, इसलिए इसे डेरा बाबा दरगाह तपस्थान गरु अमर दास जी का नाम पड़ा.

इनके अलावा हरिद्वार में शांतिकुंज, जयराम आश्रम, भूमा निकेतन, भारत माता मंदिर, वैष्णव देवी मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, श्रवण नाथ मठ, पवन धाम, दूधादरी मंदिर, बिल्केश्व महादेव मंदिर, शाही गुरुद्वारा, परमार्थ आश्रम, प्रेम नगर आश्रम, मा आनंद माई आश्रम आदि जगहें भी हैं, जहां पर्यटक और श्रृद्धालु जा सकते हैं.