रुद्रप्रयाग में सैर सपाटे के लिए यहां जाएं

रुद्रप्रयाग जिले धार्मिक पर्यटन की दृष्ट‍ि से काफी समृद्ध है. केदारनाथ जैसा तीर्थस्थल इसी जिले में है. रुद्रप्रयाग जिले में सैर-सपाटे के लिए और प्राकृतिक नजारों का लुत्‍फ लेने के लिए जगहों की कमी नहीं है. ये हैं रुद्रप्रयाग के कुछ खास सैर-सपाटे के स्‍थान.

रुद्रप्रयाग:
भोले भंडारी (रुद्र) के नाम पर ही इस जगह का नाम रुद्रप्रयाग रखा गया है. रुद्रप्रयाग शहर अलकनंदा और मंदाकिनी जैसी पवित्र नंदियों के संगम पर बसा है.
कितनी दूर: श्रीनगर से करीब 34 किमी दूर.

केदारनाथ:
समुद्र तल से 3581 मीटर की ऊंचाई पर केदारनाथ देश में भगवान श‍िव शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. चार धामों में से एक केदारनाथ में श्रद्धालु भगवान भोले भंडारी के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं.
कितनी दूर: यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋष‍िकेश 189 किमी जबकि हरिद्वार 204 किमी दूर है. यहां का नजदीकी हवाई अड्डा जौली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून के पास केदारनाथ से करीब 240 किमी दूर है.
दिल्ली से 446 किमी
पौड़ी से 141 किमी
देहरादून से 257 किमी
मसूरी से 244 किमी
देवप्रयाग से 147 किमी
कोटद्वार से 246 किमी
जोशीमठ से 124 किमी
श्रीनगर से 112 किमी
उखीमठ से 42 किमी
रुद्रप्रयाग से 80 किमी
गोपेश्वर से 81 किमी
बद्रीनाथ से 213 किमी
केदारनाथ के आसपास भैरव मंदिर, आदि शंकराचार्य की समाधी और चौराबारी ताल इलाके में गांधी सागर ऐसी जगहें हैं, जहां श्रद्धालु और पर्यटक जाना पसंद करते हैं.

अगस्तमुनि:
अगस्तमुनि समुद्र तल से करीब 1000 मीटर की ऊचाई पर मंदाकिनी नदी के किनारे बसा है. यह वही जगह है जहां अगस्त्य ऋष‍ि ने सालों तक तप किया था.
कितनी दूर: रुद्रप्रयाग से करीब 18 किमी दूर.
क्‍यों जाएं: यहां पर अगस्त्य ऋष‍ि को समर्पित एक मंदिर अगस्तेश्वर महादेव है, जिसकी महिमा के साथ ही पुरातात्विक महत्व भी खूब है.

गुप्तकाशी:
गुप्तकाशी समुद्र तल से करीब 1319 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां उखीमठ के पास नाला में एक स्तूप है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां राणा नल की कब्र है और यह गुप्तकाशी से सिर्फ 3 किमी की दूरी पर है.
कितनी दूर: उखीमठ से गुप्तकाशी की दूरी सिर्फ 12 किमी है. गोपेश्वर से 33, रुद्रप्रयाग से 34, श्रीनगर से 64, जोशीमठ से 78, पौड़ी से 93, हरिद्वार से 167, बद्रीनाथ से 165 और दिल्ली से 398 किमी दूर है गुप्तकाशी.
क्‍यों जाएं: गुप्तकाशी का महत्व किसी भी रूप में काशी से कम नहीं है. यहां प्राचीन विश्वनाथ मंदिर और अर्धनारेश्वर मंदिर हैं तो मनिकार्निक कुंड भी है, जहां माना जाता है कि पवित्र गंगा नदी की दो गुप्त धाराएं मिलती हैं.

सोनप्रयाग:
समु्द्र तल से करीब 1829 मीटर की ऊंचाई पर सोनप्रयाग बासुकी और मंदाकिनी नदी के तट पर बसा है. यह मुख्य केदारनाथ रूट पर स्थ‍ित है. सोनप्रयाग एक पवित्र स्थान है और इसका धार्मिक महत्व भी खूब है.
कितनी दूर: यहां से केदारनाथ सिर्फ 19 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: कहा तो ये भी जाता है कि सोनप्रयाग में मंदाकिनी के पवित्र जल के स्पर्श मात्र से ही व्यक्ति को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. भगवान शिव और पार्वती का विवाहस्थल त्रियुगीनारायण सड़क मार्ग से यहां से सिर्फ 14 किमी और पैदल केवल 5 किमी दूर है. यहां भगवान विष्णु का मंदिर है.

ख‍िरसू:
समुद्र तल से करबी 1700 मीटर की ऊंचाई पर ख‍िरसू की प्राकृतिक सुंदरता देखकर पर्यटक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं. यहां ठहरने के लिए टूरिस्ट रेस्ट हाउस और फॉरेस्ट रेस्ट हाउस उपलब्ध है.
कितनी दूर: पौड़ी से करीब 19 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: यहां से हिमालय की कई नामी और बेनामी चोटियों के स्पष्ट दर्शन होते हैं जो बेहद खूबसूरत दिखती हैं. ख‍िरसू एक शांत जगह है और यहां प्रदूषण का नामो-निशान भी नहीं है.

गौरीकुंड:
समुद्र तल से 1982 मीटर की ऊंचाई पर बसा गौरीकुंड केदारनाथ रूट पर आखिरी बस अड्डा है. यहां से केदारनाथ तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है.
कितनी दूर: सोनप्रयाग से 5 किमी दूर.
क्‍यों जाएं: केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री यहां विश्राम करते हैं. यहां पर गर्म पानी के तालाब में स्नान करके श्रद्धालु गौरी देवी के मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंचते हैं.

देवरिया ताल:
यह सुंदर झील चोपटा-उखीमठ रोड पर सरी गांव के पास है. झील बेहद सुंदर है और इसके चारों ओर घने जंगल हैं.
कितनी दूर: यह सुंदर झील चोपटा-उखीमठ रोड पर उखीमठ से करीब 10 किमी दूर सरी गांव से करीब 2 किमी पैदल दूरी पर है.
क्‍यों जाएं: झील के स्वच्छ-निर्मल जल में बर्फ से ढके चौखंबा पर्वत की परछाई साफ देखी जा सकती है और यह अनुभव सैलानियों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है.

चोपटा:
गोपोश्वर-उखीमठ रोड पर स्थ‍ित चोपटा समुद्र तल से करीब 2900 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यह गढ़वाल की सबसे सुंदर जगहों में से एक है.
कितनी दूर: यह गोपेश्वर-उखीमठ रोड पर गोपेश्वर से करीब 40 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: चोपटा गढ़वाल अंचल में सबसे सुंदर जगहों में से एक है. यहां से हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य आंखों के ठीक सामने नजर आता है.

गांधी सरोवर और वासुकी ताल:
समुद्र तल से करीब 4135 मीटर की ऊंचाई पर केदारनाथ के पास है वासुकी ताल. गांधी सरोवर केदारनाथ के पीछे मौजूद ग्लेश‍ियर के ऊपर है.
कितनी दूर: गांधी सरवोर केदारनाथ के पीछे मौजूद ग्लेश‍ियर के ठीक ऊपर स्थित है, जबकि वासुकी ताल केदारनाथ से करीब 8 किमी की दूरी पर है.
क्‍यों जाएं: कहा जाता है कि पांडवों में सबसे बड़े भाई युध‍िष्ठ‍िर गांधी सरोवर से ही स्वर्ग के लिए रवाना हुए थे. 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद उनकी अस्थि‍यां यहां विसर्जित की गई थीं, तभी से इसे गांधी सरोवर कहा जाता है.

ओमकारेश्वर श‍िव और उखीमठ:
समुद्र तल से करीब 1311 मीटर की ऊंचाई पर बसा उखीमठ भगवान केदारनाथ का सर्दियों का निवास स्थान है. सर्दियों में भगवान केदारनाथ की उखीमठ में ही पूजा-अर्चना होती है.
कितनी दूर: यह रुद्रप्रयाग से करीब 41 किमी और गुप्तकाशी से करीब 13 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: सर्दियों में भगवान केदारनाथ उखीमठ में ही निवास करते हैं. उखीमठ अपने मंदिरों के लिए ही जाना जाता है. यहां ऊषा-अनिरुद्ध और भगवान श‍िव-पार्वती के मंदिर हैं, जिनमें से एक में केदारनाथ की तरह भगवान श‍िव की पांच सिर वाली मूर्ति भी है.

तुंगनाथ:
तुंगनाथ मंदिर समुद्र तल से करीब 3680 मीटर की ऊंचाई पर चंद्रनाथ पर्वत के ठीक ऊपर है.
कितनी दूर: यह उखीमठ-गोपेश्वर रोड से करीब 30 किमी दूर है. तुंगनाथ जाने के लिए घने जंगल के बीच से पैदल जाना पड़ता है.
क्‍यों जाएं: तुंगनाथ मंदिर परिसर में 16 दरवाजे हैं. यहां श‍िव लिंग के साथ ही 2.5 फीट ऊंची आदि गुरु शंकराचार्य की मूर्ति लगी है. तुंगनाथ में नंदादेवी का भी मंदिर है और यह आकाश गंगा वाटर फॉल के पास ही है.

मदमहेश्वर:
मदमहेश्वर नदी के किनारे बसा श‍िव मंदिर पंचकेदारों में से एक है. लोककथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद प्राश्यचित करने के लिए आए पांडवों के सामने आने से बचने के लिए जब भोले बाबा केदारनाथ में जमीन में समाए तो मदमहेश्वर में उनकी नाभी दिखाई दी.
कितनी दूर: दिल्ली से करीब 430 किमी दूर उनियाना है, यहां से 21 किमी ट्रैकिंग के बाद मदमहेश्वर पहुंचा जा सकता है.
क्‍यों जाएं: जबरदस्त प्राकृतिक सुंदरता के बीच बसे मदमहेश्वर में पंडों, पुजारियों की भीड़ नहीं है और यहां अन्य धार्मिक स्थानों की तरह दुकानों की कतारें भी नहीं हैं.
एंडवेंचर टूरिज्‍म: अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो मदमहेश्वर से करीब 6 किमी दूर कंचनी ताल भी जा सकते हैं. यहां तक जाना किसी जबरदस्त एडवेंचर से कम नहीं है.

मां हरियाली देवी:
रुद्रप्रयाग-कर्णप्रयाग रोड के बीच से ही नागरासु की तरफ एक सड़क कटती है, जो हरियाली देवी के सिद्ध पीठ तक जाती है. हरियाली देवी समुद्र तल से करीब 1400 मीटर की ऊंचाई पर है और यह ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं व घने जंगलों के बीच बसी है.
कितनी दूर: नागरासु से हरियाली देवी करीब 22 किमी दूर है और यह रुद्रप्रयाग से करीब 37 किमी की दूरी पर है.
क्‍यों जाएं: हिन्दू पौराणि‍क कथाओं के अनुसार देवकी की सातवीं संतान महामाया को जब कंस ने गुस्से से जमीन पर पटका तो उनके अंग धरती के अलग-अलग कोनों में गिरे. महामाया का हाथ जशोली के इसी हरियाली देवी में गिरा था. तभी से हरियाली देवी एक श्रद्धेय शक्ति पीठ बन गया.

कोटेश्वर मंदिर:
रुद्रप्रयाग शहर के करीब ही अलकनंदा नदी के किनारे है कोटेश्वर मंदिर.
कितनी दूर: रुद्रप्रयाग शहर से करीब 3 किमी दूर है कोटेश्वर मंदिर.
क्‍यों जाएं: कोटेश्वर मंदिर दरअसल गुफा मंदिर है. यहां कई देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं जो प्राकृतिक रूप से बनी हैं. कहा जाता है कि केदारनाथ जाने से पहले भगवान श‍िव शंकर ने यहीं पर ध्यान-साधना की थी.

कालीमठ:
गुप्तकाशी और उखीमठ के पास ही कालीमठ है जो एक शक्ति पीठ है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की यहां बहुत श्रद्धा है.
क्‍यों जाएं: कालीमठ के काली मंदिर में साल भर हजारों की संख्या में भक्त आते रहते हैं. नवरात्रों के दौरान यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

कार्तिक स्वामी:
कार्तिक स्वामी का मंदिर समुद्र तल से करीब 3048 मीटर की ऊंचाई पर है.
कितनी दूर: रुद्रप्रयाग से करीब 38 किमी दूर रुद्रप्रयाग-पोखरी रोड पर स्थ‍ित कनक चौरी गांव से 3 किमी दूर है कार्तिक स्वामी.
क्‍यों जाएं: यहां भगवान श‍िव के पुत्र कार्तिकेय का मंदिर और मूर्ति है. कार्तिक स्वामी मंदिर के आसपास प्राकृतिक खूबसूरती देखने लायक है और यहां से हिमालय की चोटियों के शानदार दर्शन होते हैं.

चंद्रश‍िला:
ऊपरी हिमालय के सबसे आसान और पहुंच वाला चंद्रश‍िला पहाड़ समुद्र तल से 3679 मीटर की ऊंचाई पर है. खास तौर यह इसलिए भी मशहूर है, क्योंकि हिमालय के ज्यादतर पहाड़ दुर्गम हैं लेकिन यहां पहुंचना आसान है.
क्‍यों जाएं: रुद्र प्रयाग जिले के इस छोटे से पहाड़ पर जाने के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम की तरफ से व्यवस्था की जाती है. सर्दी के महीनों में स्केलिंग, स्कीइंग और जंगली फूल-पौंधों व जानवरों से भरे रास्तों, सुंदर झीलों के दर्शन और ताजा बर्फ से ढके घास के मैदानों में ट्रैकिंग यहां के आकर्षण हैं.

इंद्रासनी मंसा देवी:
रुद्रप्रयाग शहर के पास ही कंडाली पट्टी गांव में है इंद्रासनी मंसा देवी का मंदिर. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य के काल में हुआ है.
कितनी दूर: यह मंदिर रुद्रप्रयाग शहर से करीब 14 किमी दूर और तिलवारा से 6 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: इस मंदिर की वास्तुकला अद्व‍ितीय है. इंद्रासनी मंसा देवी मंदिर के आसपास ही जलकेदारेश्वर, क्षेत्रपाल और जाख देवता के मंदिर भी हैं. इंद्रासनी देवी की उत्पति के बारे में स्कंदपुराण, देवीभागवत और केदारखंड में वर्णन है.