उधमसिंह नगर में सैर सपाटे के लिए यहां जाएं

उधमसिंह नगर में सैर-सपाटे के लिए कई मशहूर जगहें हैं. तराई इलाके में होने के कारण यहां पर्यटकों को पहाड़ों की दुश्वारियां भी नहीं झेलनी पड़तीं और प्रकृति का खूब आनंद भी लिया जाता है.

काशीपुर
काशीपुर उत्‍तराखंड और देश का प्रमुख औद्यौगिक नगर है. यहां देश के तमाम बड़े औद्योगिक घरानों की फैक्‍टरियां मौजूद हैं. यह क्षेत्र उत्‍तराखंड के तराई के इलाके में बसा है और पहाड़ से उतरने वाली नदियों के कारण यह क्षेत्र खासा उपजाऊ है.
कितनी दूर: जिम कॉर्बेट रामनगर से काशीपुर करीब 45 किमी दूर है, जबकि देश की राजधानी दिल्‍ली से इसकी दूरी करीब 210 किमी है.
क्‍यों जाएं: काशीपुर औद्यौगिक नगरी है इसलिए कामकाज के सिलसिले में यहां जा सकते हैं. इसके अलावा काशीपुर को गिरीताल और द्रोणा सागर के साथ-साथ पंड़ावों के लिए भी जाना जाता है. कॉर्बेट घूमने का कार्यक्रम बना रहे हों तो काशीपुर होकर ही सड़क मार्ग है.
कब जाएं: सर्दियों में काशीपुर का नजारा काफी अद्भुत होता है. मार्च में चैती मेला देखने भी जा सकते हैं.
इतिहास: काशीपुर का नाम काशीनाथ अधिकारी के नाम पर रखा गया है. काशीनाथ अधिकारी ने ही इस शहर की स्थापना की थी. प्रसिद्ध कवि गुमानी ने इसी जगह पर अनेक कविताएं लिखी हैं.

चैती मंदिर और द्रोण सागर
चैती मंदिर उधमसिंह नगर के प्रमुख स्‍थानों में से एक है और यह काशीपुर-बाजपुर रोड पर है. यहां हर साल मार्च में मेले का आयोजन होता है. गिरीताल और द्रोण सागर काफी मशहूर जगहें हैं और इसका संबंध पांडवों से है.
कितनी दूर: काशीपुर बस स्‍टैंड से द्रोण सागर 2 किमी और चैती मंदिर 2.5 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: माता चैती देवी के दर्शन करने और मार्च यानी चैत्र महीने में यहां चैती मेले का आयोजन भी होता है. इसके अलावा नवरात्र के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं.
कब जाएं: मार्च में चैती मले के दौरान यहां जाने का सबसे अच्‍छा समय है.

नानकमत्ता  धाम:
नानकमत्ता  सिख धर्म का बहुत बड़ा धाम है. नानक माता गुरुद्वारा सरयू नदी पर बनाया गया है. नानक माता धाम में लोग पिकनिक मनाने भी आते हैं.
कितनी दूर: नानकमत्ता उधमसिंह नगर के प्रमुख शहर रुद्रपुर से 56 किमी दूर रुद्रपुर-टनकपुर मार्ग पर है.
क्‍यों जाएं: यह जगह सिख पंथ के पहले गुरु गुरुनानक से जुड़ी है. यह सिख धर्म के कुछ प्रमुख धार्मिक स्‍थानों में से एक है. यहां का गुरुद्वारा बेहद खूबसूरत है.
कब जाएं: यहां साल के किसी भी वक्‍त जाया जा सकता है.