इतिहास के झरोखे में उधमसिंह नगर

सन 1588 में मुगल शासक अकबर ने यह इलाका रुद्र चंद्र नाम के राजा को दे दिया था. राजा रुद्र ने यहां एक मिलिट्री कैंप बना दिया, ताकि तराई क्षेत्र से होने वाले आक्रमणों को यहां दबाया जा सके. इससे यहां बसे गांव रुद्रपुर गांव के अच्छे दिन आ गए. अब तक जिस गांव को कोई पूछता नहीं था, जिसका कोई महत्व नहीं था, अब वहां मिलिट्री कैंप था. कहा ये भी जाता है कि रुद्रपुर का नाम राजा रुद्र के नाम पर ही पड़ा है. तराई के इस क्षेत्र के असल में दिन आजादी के बाद बहूरे. विभाजन के बाद लाखों की संख्या में पाकिस्तान से आए शरणार्थ‍ियों को यहां बसाया गया. यहां सिखों की बड़ी संख्या है.

1948 से पहले यह क्षेत्र दलदली भूमि होने के कारण पूरी तरह से उपेक्ष‍ित था. यहां बहुत ज्यादा गर्मी के साथ ही महीनों तक बारिश होती रहती थी. जंगली जानवरों का डर भी हमेशा बना रहता था. इतिहासकारों के अनुसार हजारों साल पहले यहां से गुजर रहे भगवान रुद्र के एक भक्त या कबायली नेता ने यहां रुद्रपुर नाम का गांव बसाया. जिसने आज रुद्रपुर शहर का रूप ले लिया है और वह इस जिले का जिला मुख्यालय भी है.

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