बागेश्वर के मेले और धार्मिक आयोजन

बागेश्‍वर के मेले (कौतिक) न केवल धार्मिक, सामाजिक और लोगों की सांस्‍कृतिक पृष्‍ठभूमि की अभ‍िव्‍यक्‍ति करते हैं, बल्‍कि यह लोक संस्‍कृति और आर्थ‍िक गतिविधियों के भी केंद्र होते हैं. इन्‍हीं मेले-कौतिक और धार्मिक आयोजनों में लोग बच्‍चों के लिए खिलौने और कपड़ों से लेकर घर की जरूरी वस्‍तुएं तक खरीदते हैं. वैसे तो अल्‍मोड़ा जिले में सालभर छोटे-बड़े कौतिक-मेले और धार्मिक आयोजन होते रहते हैं, लेकिन उनमें से कुछ चुनिंदा और बड़े आयोजन इस प्रकार हैं.

उत्‍तरायणी मेला, बागेश्‍वर
आयोजन कब और कहां: बागेश्‍वर में सरयू और गोमती नदी के तट पर भगवान शिव के बागनाथ मंदिर के पास हर साल जनवरी में इस मेले का आयोजन होता है.
कितने दिन का आयोजन: उत्‍तरायणी मेला 1 हफ्ते तक चलता है.
कितनी दूर दूर: बागेश्‍वर उत्‍तरायणी मेला आयोजन स्‍थल की अल्‍मोड़ा से दूरी 90 किमी है.
मंदिर का इतिहास: बागेश्‍वर में शिव मंदिर का निर्माण 1450 में उस समय कुमाऊं के राजा लक्ष्‍मी चंद ने करवाया था.

बिखोती मेला:
आयोजन कब और कहां: बिखोती का मेला संक्रांति के दिन द्वारहाट, स्‍यालदे, चौघर और लोहाखाई में आयोजित होता है. इस दिन पूरी, बड़ा और मछली भी खाई जाती हैं.