नैनीताल के ये नजारे छोड़कर कहां जाएंगे

नैनीताल जिला उत्तराखंड और खासकर कुमाऊं क्षेत्र के पर्यटन की रीढ़ है. यहां एक से बढ़कर एक नजारे देखने को मिलते हैं. यहां नैनीताल, भीमताल और मुक्तेश्वर की ठंडी फिजाएं हैं तो कॉर्बेट नेशनल पार्क में बाघों की दहाड़ व हाथियों की चिंघाड़ भी है. यहां सुंदर ताल और उनमें स्वच्छंद विचरण करते हंसों के जोड़ों को देखा जा सकता है तो यहां की हसीन वादियों में अपने जीवन की नई शुरुआत करने (हनीमून मनाने) के लिए आए नए जोड़ों को भी देखा जा सकता है. सैर सपाटे के शौकीनों के लिए नैनीताल जिले में ऐसा बहुत कुछ है, जो उन्हें यहां बार-बार खींच लाता है. जिले की कुछ प्रमुख सैरगाहों के बारे में यहां जानें…

नैनीताल
नैनीताल जिले का एक प्रमुख नगर स्वयं नैनीताल शहर है. नैनीताल तीन ओर से घने पेड़ों की छाया में ऊंचे-ऊंचे पर्वतों के बीच समुद्रतल से 1938 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां के ताल की लंबाई 1358 मीटर और चौड़ाई 458 मी‍टर के करीब है. ताल की गहराई 15 से 156 मीटर तक आंकी गई है. इस ताल के पानी की अपनी विशेषता भी है. गर्मियों में जहां ताल का पानी हरा दिखाई देता है वहीं यह बरसात में मटमैला और सर्दियों में हल्का नीला दिखता है.

नैनीताल में एडवेंचर स्पोर्ट्स:
वाटर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए नैनीताल स्वर्ग से कम नहीं है. यहां का नैनीताल याट कलब नौकायन परंपरा और विरासत को सहेजे हुए है. यहां हर साल राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की नौका दौड़ होती हैं. गर्मी के मौसम में नैनीताल की झील में स्विमिंग कॉम्पटीशन भी होते हैं. इसके अलावा कैनोइंग और कयाकिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी इस खूबसूरत झील में होते हैं.

अगर आप स्काई एडवेंचर का लुत्फ लेना चाहते हैं तो नौकुचियाताल में पैरासैलिंग की सुविधा उपलब्ध है.

एडवेंचर स्पोर्ट्स में हॉटबलूनिंग भी अपना अलग स्थान रखता है और यह नैनीताल का एक और आकर्षण है.

माउंटेनियरिंग यानी पर्वतारोहण के शौकीनों के लिए नैनीताल में काफी कुछ है. नैनीताल माउंटेनियरिंग क्लब पर्वतारोहरण और रॉक क्लाइबिंग की ट्रेनिंग देता है और इसे इस क्षेत्र में महारत हासिल है.

इसके अलावा यहां राज भवन के गोल्फ कोर्स में हर साल गोल्फ टूर्नामेंट का आयोजन होता है. यहां 9 होल गोल्फ कोर्स है. अलग-अलग मौसम मल्लीताल के फ्लैट्स में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट और बॉक्सिंग टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है.

कितनी दूर: नैनीताल शहर दिल्ली से 320 किमी दूर है. जबकि यह अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम से 34 किमी दूर है.

इतिहास: नैनीताल की खोज सन 1841 में एक अंग्रेज चीनी (शुगर) व्यापारी ने की. बाद में अंग्रेजों ने इसे अपनी आरामगाह और स्वास्थ्य लाभ लेने की जगह के रूप में विकसित किया.

धार्मिक महत्व: नैनीताल का धार्मिक महत्व भी खूब है. स्कंद पुराण के मानस खंड में इसे ‘त्रि-ऋष‍ि-सरोवर’ कहा गया है. ये तीन ऋष‍ि अत्री, पुलस्थ्य और पुलाहा ऋष‍ि थे. इस इलाके में जब उन्हें कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने यहां एक बड़ा सा गढ़ा किया और उसमें मनसरोवर का पवित्र जल भर दिया.

क्‍यों जाएं: मैदानी हिस्सों से पर्यटक यहां गर्मियों में ठंडी हवा का लुत्फ लेने और सर्दियों में बर्फबारी देखने के लिए आते हैं. यहां चारों ओर प्राकृतिक सुंदरता बिखरी हुई है. नैनीताल के अलावा इसके आसपास कई अन्य ताल और चोटियां हैं, जहां सैर करने का अपना अलग ही मजा है. इसके अलावा नैनीताल के ये नजारे भी तो हैं…

तल्ली एवं मल्ली ताल:
नैनीताल में ताल के दोनों ओर सड़कें हैं. ताल का मल्ला भाग (ऊपरी हिस्सा) मल्लीताल और नीचला भाग तल्लीताल कहलाता है. मल्लीताल में एक फ्लैट खुला मैदान है और यहां पर नए-नए खेल तमाशे होते रहते हैं. इस फ्लैट पर शाम होते ही सैलानी इकट्ठे हो जाते है. यहीं पर नैना देवी मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा भी है.
मल्लीताल से तल्लीताल को जोड़ने वाली सड़कर को माल रोड कहा जाता है. सैर-सपाटे के लिए यहां आने वाले सैलानी पैदल ही इस दूरी को शॉपिंग करते हुए तय कर लेते हैं.

नैनीताल की सात चोटियां:
सात चोटियां नैनीताल की शोभा बढ़ाती हैं. यहां आने वाले सैलानी इनकी सैर करना नहीं भूलते.

चाइना पीक (नैनापीक):
सात चोटियों में 2611 मीटर ऊंची चाइना पीक यहां की सबसे ऊंची चोटी है. चाइना पीक की दूरी नैनीताल से लगभग 6 किलोमीटर है. इस चोटी से हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों (बंदर पूंछ, एपीआई और नेपाल की नारी पीक) के दर्शन होते हैं.

किलवरी
2528 मीटर की ऊंचाई पर दूसरी पर्वत चोटी है और इसे किलवरी कहते हैं. यह पिकनिक मनाने के लिए शानदार जगह है.

लड़ियाकांटा
इस पर्वत श्रेणी की ऊंचाई 2481 मीटर है और यह नैनीताल से लगभग साढ़े पांच किलोमीटर दूर है. यहां से नैनीताल के ताल को देखना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है.

देवपाटा और केमल्स बैक
देवपाटा और केमल्स बैक नाम की ये दोनों चोटियां साथ-साथ हैं. देवपाटा की ऊंचाई 2435 मी‍टर है जबकि केमल्स बैक 2333 मीटर ऊंची है.

डेरोथी सीट और टिफिन टॉप
डेंरोथी सीट असल में अयांरपाटा पहाड़ी है. लेकिन एक अंग्रेज केलेट ने अपनी पत्नी डेरोथी की याद में इस पहाड़ की चोटी पर उसकी कब्र बनाई और उसका नाम डेरोथीसीट रख दिया. तभी से यह डेरोथीसीट के नाम से जाना जाता है. टिफिन टॉप से हिमालय के खूबसूरत नजारे दिखते हैं.

स्नोव्यू और हनी-बनी
नैनीताल से केवल ढाई किलोमीटर और 2270 मीटर की ऊंचाई पर हवाई पर्वत चोटी है. मल्लीताल से रोपवे के माध्यम से यहां आसानी से जाया जा सकता है. यह चोटी ‘शेर का डाण्डा’ पहाड़ पर है. स्नोव्यू से लगी हुई दूसरी चोटी हनी-बनी है, जिसकी ऊंचाई 2179 मीटर है, यहां से भी हिमालय का सुंदर नजारा दिखता है.

नैनीताल जू:
नैनीताल का चिड़‍ियाघर बस अड्डे से करीब 1 किमी दूर समुद्र तल से 21 मीटर की ऊंचाई पर है. चिड़ि‍याघर में बंदर से लेकर हिमालय का काला भालू, तेंदुए, साइबेरियाई बाघ, पाम सिवेट बिल्ली, भेड़िया, चमकीले तितर, गुलाबी गर्दन वाले प्रकील पक्षी, पहाड़ी लोमड़ी, घोरल, हिरण और सांभर जैसे जानवर हैं.

रोप-वे:
मल्लीताल से रोपवे का आनंद लिया जा सकता है. यहां दो ट्रॉली से आसमानी सैर करके नैनीताल के खूबसूरत नजारों के दर्शन होते हैं. ट्रॉली एक तरफ का सफर तय करने में करीब 152 सेकेंड का समय लेती है.

घुड़सवारी:
नैनीताल आने वाले सैलानियों के लिए हॉर्स राइडिंग एक और आकर्षण है. यहां बारापत्थर से घोड़े किराए पर लेकर सैलानी नैनीताल की अलग-अलग चोटियों की सैर करते हैं.

राजभवन:
इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस की तर्ज पर बनाए गए राजभवन का निर्माण अंग्रेजों ने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के गवर्नर के रहने के लिए किया था. अब यहां उत्तराखंड के राज्यपाल का निवास है और राज्य के अतिथ‍ि भी यहां आकर ठहरते हैं.

केव गार्डन:
नैनीताल आने वाले सैलानियों के लिए यह बिल्कुल नया फीचर है और यह ज्यादा पुराना भी नहीं है. यह मल्लीताल से करीब एक किमी दूर सूखाताल इलाके में कुमाऊं विश्वविद्यालय कैंपस के पास है.

हनुमान गढ़ी:
हनुमान गढ़ी एक धार्मिक जगह है और यह नैनीताल बस अड्डे से करीब 3.5 किमी दूर समुद्र तल से 1951 मीटर की ऊंचाई पर है. इस जगह से डूबते सूर्य का खूबसूरत नजारा दिखता है और यह इसी के लिए मशहूर है.

आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जरवेशनल साइंस (ARIES)
यह इंस्टीट्यूट मनोरा पीक पर हनुमान गढ़ी से करीब 1 किमी की दूरी पर बसाया गया है. सड़क मार्ग से यह नैनीताल से करीब 9 किमी दूर है. यह केंद्र खगोलीय अध्यन और कृत्रिम उपग्रहों पर निगरानी रखने के लिए बनाया गया है. रात में तारों और ग्रहों को देखने के लिए यहां कुछ चांदनी रातें तय की गई हैं और अगर कोई सैलानी आसमान की गहराई में झांकना चाहता है तो यहां आने के लिए अनुमति की जरूरत होती है.

यहां जाकर तारों का नजदीकी से अवलोकन करने के लिए अनुमति की जरूरत होती है और इससे जुड़ी जानकारी के लिए www.aries.res.in वेबसाइट पर लॉगइन किया जा सकता है. इसके अलावा ऑब्जरवेटरी के फोन नंबर 05942-235136 और 05942-235883 से भी जानकारी ली जा सकती है.

नैनीताल के आसपास अन्य कई सैर गाहें हैं, जहां जाकर पर्यटक प्रकृति का आनंद ले सकते हैं.

पटुवा डांगर
नैनीताल से हल्द्वानी की सड़क पर चीड़ के घने पेड़ों के बीच एक छोटी सी बस्ती सड़क के दाईं ओर बसी है. इसी बस्ती को पटुवा डांगर कहा जाता है. यहां उत्तराखंड का सबसे बड़ा वैक्सीन संस्थान है.
कितनी दूर: नैनीताल से करीब 15 किमी दूर.
क्‍यों जाएं: घने जंगल के बीच बसी यह बेस्ती बेहद सुंदर है और अगर नैनीताल जा ही रहे हैं तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता का भी भरपूर लुत्फ उठाएं.

हल्द्वानी
भाबर क्षेत्र में बसाए जाने वाले नगरों में से पहला नगर हल्द्वानी ही है. यह नैनीताल जिले का सर्दियों का मुख्यालय भी है. यह नगर नैनीताल जिले और कुमांऊं क्षेत्र का सबसे बड़ा नगर है. यहां सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं.
कितनी दूर: हल्द्वानी नैनीताल से सिर्फ 38 किमी दूर है. अगर आप दिल्ली, मेरठ आदि मैदानी इलाकों से नैनीताल जा रहे हैं तो हल्द्वानी रास्ते में पड़ता है.
क्‍यों जाएं: नैनीताल जा रहे हों तो सभी सुविधाओं से सम्पन्न यह पहाड़ से पहले अंतिम शहर है. नैनीताल घूमने जाने वाले सैलानी हल्द्वानी को अपना बेस बनाकर भी सैर-सपाटे को जाते हैं.

भुवाली और घोड़ाखाल
कुमाऊं क्षेत्र के पहाड़ों की ओर जाने वाली सड़कों का भुवाली में चौराहा है. भुवाली को 1912 में अने अपने टीबी सेनेटोरियम के लिए भी जाना जाता है.
कितनी दूर: भुवाली नैनीताल से करीब 11 किमी दूर है और भुवाली से घोड़ाखाल 3 किमी दूरी पर है.
क्यों जाएं: भुवाली की खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है जबकि घोड़ाखाल में ग्वेल (गोलू) देवता का विशाल मंदिर है. यहां भक्त आकर उनसे अपनी मनोकामना पूरी करने की अर्जी लगाते हैं. घोड़ाखाल का सैनिक स्कूल देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है.

सात ताल
समुद्र तल से 1370 मीटर की ऊंचाई पर सात ताल में कई छोटी-छोटी झीलें हैं. कई बार सात ताल की तुलना इंग्लैंड के वेस्टमोरलैंड से की जाती है. यहां अमेरिकी मिशनरी स्टेनली जॉन का आश्रम भी है.
कितनी दूर: नैनीताल से 23 किमी दूर.
क्यों जाएं: अपने नाम के अनुसार ही यहां सात झीलें हैं. यहां जाने के बाद सबसे पहले ‘नल दमयंती झील’ दिखती है. इसके बाद ‘पन्ना’ और ‘गरूड़’ झीलें दिखाई देती हैं. इसके बाद तीन झीलें एक साथ दिखती हैं और इनका नाम ‘राम’, ‘लक्ष्मण’ और ‘सीता’ लेक है.

भीमताल और नौकुचियाताल:
भीमताल और नौकुचिया दोनों तालों की खूबसूरती जबरदस्त है. भीमताल की झील तो नैनीताल की झील से भी बड़ी है. जबकि नौकुचियाताल की खासियत इसके नौ कोने हैं.
कितनी दूर: भीमताल, नैनीताल से 22 किमी दूर है और यहां से 4 किमी दूर यानी नैनीताल से कुल 26 किमी दूर नौकुचियाताल है.
क्यों जाएं: नौकुचियाताल में आप रंग-बिरंगे पक्ष‍ियों के दर्शन कर सकते हैं. इसके अलावा यहां रोईंग, पैडिंग और याटिंग की सुविधा भी है. भीमताल में सैलानी वोटिंग का भरपूर लुत्फ उठाते हैं.

कैची धाम:
नीम करोली बाबा का यह आश्रम आधुनिक जमाने का धाम है. यहां पर मुख्य तौर पर बजरंगबली की पूजा होती है.
कितनी दूर: कैची धाम नैनीताल से 17 किमी और भुवाली से 9 किमी दूर अल्मोड़ा रोड पर है.
क्यों जाएं: बजरंग बली का आशीर्वाद लेने और नीम करोली बाबा के बारे में जानने के लिए पर्यटक यहां आते हैं.

रामगढ़:
समुद्र तल से 1789 मीटर की ऊंचाई पर बसा रामगढ़ अपनी हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाता है. यह सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.
कितनी दूर: नैनीताल से रामगढ़ की दूरी 25 किमी और भुवाली से 14 किमी है.
क्यों जाएं: यहां से हिमालय पर्वत माला के दर्शन होते हैं. इसके अलावा पहाड़ी फल जैसे आड़ू, पूलम, खुबानी और सेब के बाग यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. रामगढ़ में अरबिंदो आश्रम भी है.
इतिहास: मशहूर साहित्यकार रविंद्रनाथ टैगोर और महादेवी वर्मा ने यहां काफी समय गुजारा और प्रकृति को बेहद करीब से देखा.

मुक्तेश्वर:
समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर बसे मुक्तेश्वर में खूबसूरत फलों के बगीचे हैं. यहं शंकुधारी जंगलों से घिरा हुआ है. 1893 में अंग्रेजों ने इस जगह को बसाया.
कितनी दूर: यह खूबसूरत जगह नैनीताल से करीब 51 किमी दूर है.
क्यों जाएं: 1893 में अंग्रेजों ने मुक्तेश्वर में अनसंधान और श‍िक्षा संस्थान (IVRI) की स्थापना की थी. यहां से हिमालय का विहंगम दृष्य आंखों के ठीक सामने दिखता है.

रामनगर- कॉर्बेट नेशनल पार्क
कॉर्बेट नेशनल पार्क को भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान होने का गौरव हासिल है. इस नेशनल पार्क की स्थापना 1936 में हेली नेशनल पार्क के रूप में हुई थी. आजादी के बाद सन 1957 में इसका नाम बदलकर कॉर्बेट नेशनल पार्क रख दिया गया.

कार्बेट नेशनल पार्क बाघों के लिए सुरक्ष‍ित व प्राकृतिक आवास है. बाघ के अलावा यहां हाथी, हिरण, चीतल, बारहसिंगा, चीता, तेंदुआ, नील गाय, जंगली सूअर और ऐसे ही कई वन्य जीव पाए जाते हैं. इनके अलावा पक्ष‍ियों 580 प्रजातियां हैं जो यहां रहती हैं या किसी खास मौसम में यहां आती हैं. घड़‍ियाल, मगरमच्छ, अजगर, किंग कोबरा, कछुआ, मॉनिटर लिजर्ड (छिपकली) जैसे सरीसृप भी इस जंगल में पाए जाते हैं.

कितनी दूर: नैनीताल से करीब 62 किमी, दिल्ली से 240 किमी दूर है.

कॉर्बेट जाने का सर्वोत्तम मौसम: कार्बेट नेशनल पार्क साल के कुछ महीनों में पर्यटकों के लिए बंद रहता है. जबकि ज्यादातर समय यहां पर्यटक घूमने-फिरने आते हैं.

कार्बेट के आसपास सैर-सपाटे की जगहें: जिम कॉर्बेट संग्रहालय और कालाढूंगी हेरिटेज ट्रेल, कॉर्बेट फॉल, सीताबनी, गर्जिया माता मंदिर, सेंटर फॉर ईको टूरिज्म, बाराती रौ फॉल, कालागढ़ बांध.

गर्जिया माता मंदिर
रामनगर से करीब 12 किमी दूर कॉर्बेट जंगल में कोसी नदी के बीच उभरे एक पहाड़ की चोटी पर माता गर्जिया (गिरिजा) का मंदिर है. गर्जिया मंदिर में वैसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यहां मेला लगता है तो खूब धूम मचती है.

यहां से मिलेगी कॉर्बेट के बारे में जानकारी:
फील्ड डायरेक्टर, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर (नैनीताल) पिन- 244715
फोन नंबर: 05947-251489, फैक्स: 251012, 251376
ईमेल पता: dirctr@yahoo.in, वेबसाइट: www.corbettnationalpark.in

रहने की व्यवस्था:
फॉरेस्ट रेस्ट हाउस कॉर्बेट
रिजर्वेशन ऑफिस (ढिकाला, ख‍िनौली, बिजरानी): 05947- 254220, 251332,
251346, 251489, 251376

टूरिस्ट रेस्ट हाउस- कुमाऊं मंडल विकास निगम
रामनगर: 251225

कालाढूंगी: 05942 – 242124 (रामनगर से 30 किमी दूर)
कॉर्बेट कैंप जंगल लोर, कालाढूंगी: 05942- 242117
मन्नू महारानी, रामनगर: 284230 वेबसाइट: www.manumaharani.com
कॉर्बेट रिवर साइड रिजॉर्ट: 284125, 284126
इनफिनिटी रिजॉर्ट: 251280, 284157
दि क्लेरिजेस कॉर्बेट हाइडवे: 284132, 284134
रामगंगा रिजॉर्ट, मरचुला (रामनगर से 35 किमी दूर): 291592