अल्मोड़ा-रानीखेत के ये नज़ारे छोड़कर कहां जाएंगे

अल्‍मोड़ा जिला मुख्‍यालय होने के साथ ही पिछले करीब 400 सालों से कुमाऊं क्षेत्र का सांस्‍कृतिक और राजनीतिक केंद्र भी है. यहां के नजारे तो दर्शनीय हैं ही, इस शहर के आसपास भी कई ऐसी सैर-सपाटे की जगहें हैं जिनकी तरफ पर्यटक खिंचे चले आते हैं.

 चितई मंदिर
अल्‍मोड़ा से दूरी: चितई मंदिर के दर्शन करके दिन में ही वापस अल्‍मोड़ा लौटा जा सकता है.
क्‍यों मशहूर है: चितई मंदिर भक्‍तों द्वारा चढ़ाई गई छोटी-बड़ी हजारों पीतल की घंटियों के संग्रह के लिए मशहूर है.
क्‍यों जाएं: यहां से सूर्यास्‍त का नजारा खास होता है, साथ ही चितई माता का आशीर्वाद भी मिल जाता है. 

जागेश्‍वर मंदिर
कितनी दूर: यह अल्‍मोड़ा से करीब 35 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: यह हिन्‍दूओं का एक मशहूर धार्मिक स्‍थल है. माना जाता है कि शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक यहां है. महाकाव्‍य महाभारत में भी इस जगह का उल्‍लेख है. जागेश्‍वर मंदिर परिसर संकरी और खूबसूरत घाटी में बसा है जो केदार के पेड़ों से ढका है.
इतिहास: यहां के मुख्‍य मंदिर का निर्माण 8वीं या 9वीं सदी में हुआ था.

कसार देवी
कसार देवी में कई यूरोपीय लोग रहते हैं. यहां की सुंदरता से मोहित होकर लोगों का घर लौटने का मन ही नहीं करता.

नंदा देवी
नंदा देवी मंदिर सैकड़ों सालों से अल्‍मोड़ा का सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र है.

लाला बाज़ार
पक्‍के पत्‍थरों की सड़क पर बसा अनूठा लाल बाजार पिछले करीब 200 सालों से अल्‍मोड़ा शहर की शान है.

रानीखेत
अल्‍मोड़ा से करीब 50 किमी की दूरी पर बसा रानीखेत शहर भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट का हेडक्‍वार्टर भी है. यह शहर अपनी स्‍वास्‍थ्यवर्धक जलवायु, सुहावनी व शुद्ध हवा और दिलकश नजारों के लिए जाना जाता है. चीड़ और बांज के पेड़ों के बीच बसे रानीखेत में कुमाऊं रेजीमेंट का म्‍यूजियम और खूबसूरत गोल्‍फ कोर्स भी दर्शीन स्‍थान हैं.

बिनसर
अल्‍मोड़ा से दूरी: बिनसर अल्‍मोड़ा शहर से सिर्फ 30 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: बिनसर में बांज और बुरांश के पेड़ों का घना जंगल है, लेकिन इसके बावजूद यहां से हिमालय की चोटियों का दिलकश और नजदीकी नजारा दिखाई देता है. इस इलाके को अब वन्‍यजीव अभ्‍यारणय घोषित कर दिया गया हैं.
मंदिर: यहीं बिनसर का मंदिर भी है. कहा जाता है कि यहां आकर नास्‍तिक व धूर्त भी सुधर जाते हैं और उन्‍हें उस परमशक्‍ति में विश्‍वास होने लगता है.

शीतला खेत
कितनी दूर: शीतला खेत रानीखेत और अल्‍मोड़ा के बीच बसा है. यह रानीखेत से करीब 31 किमी और अल्‍मोड़ा से करीब 42 किमी दूर है.
क्‍यों जाएं: यहां से हिमालय पर्वत के खूबसूरत नजारे तो दिखते ही हैं, साथ ही यह जगह फलों के बगीचों के लिए भी मशहूर है. यहां अक्‍सर स्‍काउट कैंप होते रहते हैं.
मंदिर: शीतला खेत से करीब 3 किमी दूर पहाड़ी रास्‍ते पर स्‍याही देवी का खूबसूरत मंदिर है.
इतिहास: स्‍वतंत्रता सेनानी और उत्‍तर प्रदेश के पहले मुख्‍यमंत्री गोविंद बल्‍लभ पंत का जन्‍म स्‍थान खूंट यहां से बेहद करीब है. कुछ साल पहले ही माटी के इस लाल की याद में यहां एक स्‍मारक बनाया गया है.

जालना
कितनी दूर: जालना अल्‍मोड़ा से 35 किमी दूरी पर बसा है.
क्‍यों जाएं: यहां से हिमालय का शानदार नजारा दिखता है. इसके अलावा यहां आड़ू, खुबानी, नाशपाती, आलूबुखारा और सेब जैसे फलों के कई बगीचे हैं. इन बगीचों की सैर करके ताजा फलों का लुत्‍फ लिया जा सकता है.

द्वाराहाट
कितनी दूर: यह शहर रानीखेत से 32 किमी दूरी पर रामगंगा नदी के किनारे बसा है.
इतिहास: यह शहर रामगंगा नंदी की विशाल घाटी में बसा है. यह शहर पुरातात्‍विक और ऐतिहासिक दोनों रूप से महत्‍वपूर्ण है. माना जाता है कि यह शहर कत्‍यूरी राजवंश की कुछ शाखाओं की राजधानी भी होगी.
क्‍यों जाएं: द्वाराहाट से करीब 10 किमी दूरी पर मशहूर दूनागिरी मंदिर है. किंवदंतियों के अनुसार पहाड़ के ऊपर बसे दूनागिरी मंदिर में प्रसिद्ध प्राण बचाने वाली संजीवनी बूटी पाई जाती है.

मानिला
कितनी दूर: मानिला रानीखेत से करीब 85 किमी दूर है.
इतिहास: मानिला देवी मशहूर कत्‍यूरी राजवंश की देवी हैं.
क्‍यों जाएं: मानिला का मतलब जादुई और सम्‍मोहक होता है. मानिला घने जंगलों से घिरा है और यहां से हिमालय के अद्भुत नजारे दिखाई देते हैं.

कटारमल
कितनी दूर: कटारमल अल्‍मोडा से करीब 17 किमी उत्‍तर-पश्चिम में बसा है.
क्‍यों जाएं: कटारमल अपने 800 साल पुराने सूर्य मंदिर के लिए मशहूर है. इसके अलावा देश में इकलौता सूर्य मंदिर ओड‍ि‍सा के पुरी में कोर्णाक सूर्य मंदिर है.