नैनीताल के मेले और धार्मिक आयोजन

नैनीताल जिला समूचे उत्तराखंड और खासकर कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन उद्योग की रीढ़ है. यहां सालभर पर्यटक आते रहते हैं और पर्यटकों को यहां की संस्कृति से रूबरू कराने के लिए यहां कौतिक, मेले और फेस्ट का आयोजन होता रहता है. इसके अलावा कुमाऊं की संस्कृति के अनुसार भी यहां साल भर कौतिक व धार्मिक आयोजन होते रहते हैं.

शरदोत्सव या हेमंतोत्सव:
हर साल नैनीताल में शरदोत्सव या हेमंतोत्सव का आयोजन होता है. यहां मुंबई से कलाकारों, गायकों आदि को बुलाया जाता है. इसके अलावा कुमाऊं के सांस्कृतिक आयोजन भी इस उत्सव के दौरान कौतूहल पैदा करते हैं.
आयोजन कब और कहां: शरदोत्सव या हेमंतोत्सव का आयोजन नैनीताल शहर में ही हर साल नवंबर महीने के पहले पखवाड़े में होता है.
कितने दिन का आयोजन: यह आयोजन 4 दिन तक चलता है.

हरेला मेला
हरेला पूरे कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाता है. यह साल में तीन बार चैत्र नवरात्र और श्रावण नवरात्र के अलावा अश्विन माह में मनाया जाता है. श्रावण हरेला श्रावण महीने के पहले दिन (जुलाई के अंतिम दिनों में) मनाया जाता है.
आयोजन कब और कहां: हरेला मेले का आयोजन भीमताल शहर में हर साल हरेला त्योहार के मौके पर 16 व 17 जुलाई को होता है.
कितने दिन का आयोजन: मेले का आयोजन दो दिन तक होता है.
धार्मिक महत्व: भगवान शि‍व और माता पार्वती के विवाह के रूप में मनाया जाता है. इस मौके पर श‍िव-पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती हैं और उनकी पूजा होती है.

गर्जिया मेला
रामनगर के पास कॉर्बेट जंगल में कोसी नदी के बीच उभरे एक पहाड़ की चोटी पर माता गर्जिया (गिरिजा) का मंदिर है. गर्जिया मंदिर में वैसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यहां मेला लगता है तो खूब धूम मचती है.
कितने दिन का आयोजन: मेला पूरे कार्तिक के महीने चलता है. यहां श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं.
कितनी दूर: यह रामनगर बस स्टैंड से करीब 12 किमी दूर है.

नंदाअष्टमी मेला
आयोजन कब और कहां: नंदाअष्टमी मेले का आयोजन वैसे तो पूरे कुमाऊं क्षेत्र में होता है, लेकिन नैनीताल में नंदादेवी मंदिर और भुवाली का मेला खास है.
कितने दिन का आयोजन: इस मेले का आयोजन शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर एक दिन के लिए होता है.